आश्वासन के बाद भी नहीं मिला मुआवजा, ग्रामीणों ने दमोह-सागर जबलपुर मार्ग पर लगाया जाम,घंटों फंसी रही दोनों तरह दर्जनों बसे और स्कूली बच्चे फर्जी बाड़े की जांच को किया नजर अंदाज 

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, तेंदूखेड़ा।

तेंदूखेड़ा से करीब तीन किलोमीटर दूर दमोह-सागर मार्ग पर सोमवार दोपहर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब उनारीखेड़ा गांव के कुछ ग्रामीणों सहित कुछ अन्य लोग बिना पूर्व सूचना के मुख्य मार्ग पर धरने पर बैठ गए। सड़क पर धरना शुरू होने से दमोह-जबलपुर और सागर की ओर आने जाने वाले दोनों तरफ के वाहनों की लंबी कतार लग गई। एंबुलेंस और स्कूली बसें भी जाम में फंस गईं।

सूचना मिलते ही तेंदूखेड़ा तहसीलदार विवेक व्यास और पुलिस मौके पर पहुंची। इसी दौरान ग्राम बम्होरी के दर्जनों लोग भी मौके पर पहुंच गए और जाम लगाए जाने का विरोध करते हुए धरने पर बैठे लोगों को वहां से हटाया  ग्रामीणों के आक्रोश के बाद घण्टे भर बाद  मार्ग पर आवागमन शुरू हो सका।

          ग्रामीणों का कहना है दूसरी लिस्ट के बाद उन्होंने अपात्रों को पात्र करने की शिकायत की थी जो लोग फर्जी पात्र हुये थे उनकी जांच की माग की थी उसी  दौरान कलेक्टर, डीएफओ और एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि जांच के बाद पात्र लोगों को पात्र किया जाएगा और दो माह के भीतर उनके खातों में मुआवजे की राशि पहुंच जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी न तो उन्हें पात्र किया गया और न ही मुआवजे की राशि मिली।

      ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि उन्हें पात्र नहीं करना था तो अधिकारियों की ओर से पात्र करने का आश्वासन क्यों दिया गया। उनका आरोप है कि विस्थापन प्रक्रिया में कई अपात्र लोगों को पात्र कर मुआवजा दिया गया, जबकि वास्तविक रूप से प्रभावित लोग अब भी अपने अधिकार के लिए भटक रहे हैं।

   धरने में शामिल कुछ लोगों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि वे पहले विस्थापन प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि अधिकारियों को भी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी थी, लेकिन मामला दबाने के लिए उन्हें पात्र करने का आश्वासन दिया गया। अब उन्हें लग रहा है कि आश्वासन देकर गुमराह किया गया।

        ग्रामीणों का कहना है कि यदि पात्र करने का आश्वासन दिया गया था तो अब तक उन्हें मुआवजा क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने विस्थापन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और पात्र लोगों को मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान विस्थापन प्रक्रिया में लेनदेन की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

                *जाम से परेशान हुए राहगीर*

उनारीखेड़ा से आए ग्रामीणों ने जब ग्राम बम्होरी त्रिगड्डा के पास मुख्य मार्ग पर जाम लगाया तो दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। दमोह-जबलपुर मार्ग के साथ सागर की ओर आने-जाने वाले वाहन भी फंस गए। एंबुलेंस और स्कूली बसों के जाम में फंसने के बाद स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया।

मौके पर पहुंचे तहसीलदार विवेक व्यास ने धरना दे रहे लोगों से कहा कि प्रशासन की ओर से मामले की कई बार जांच कराई जा चुकी है। तीन-तीन बार जांच के बाद भी कई लोग अपात्र पाए गए हैं और सभी के प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे जा चुके हैं।

इसी दौरान जाम स्थल पर कुछ लोगों द्वारा उत्पात किए जाने की सूचना पर पुलिस ने उन्हें वहां से हटाकर थाने भेजा।

    बम्होरी निवासी एवं भाजपा पदाधिकारी  परमसींग लोधी ने कहा कि यदि ग्रामीणों को विस्थापन से संबंधित समस्या है तो उन्हें तहसील कार्यालय जाकर अपनी मांग रखनी चाहिए और वहां प्रदर्शन करना चाहिए। बिना अनुमति गांव के मुख्य मार्ग पर जाम लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जाम के कारण गांव के बच्चों की गाड़ियां और स्कूली बसें घंटों फंसी रहीं। एंबुलेंस सहित अन्य वाहन भी प्रभावित हुए। उन्होंने प्रशासन से जाम लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।   

          तेंदूखेड़ा तहसीलदार डाक्टर विवेक व्यास ने बताया कई विस्थापित ग्रामीणों के प्रकरण की  जांच करके जिला सीमित को भेजा गया है आखिरी निर्णय जिले से ही होता है 

 जाम लगाना अवैध था इसलिए तेंदूखेड़ा पुलिस को कार्यवाही करने निर्देशित किया गया है एक दो शराबी भी उत्पात मचा रहे थे उनको पुलिस के सुप्रत किया है 

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