मरम्मत के बाद भी जर्जर पुल, एक माह से बंद बसों का आवागमन सर्रा-कूदपुरा मार्ग पर ग्रामीण परेशान, 8 से 10 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर

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तेंदूखेड़ा। विकास और मरम्मत कार्यों को लेकर भले ही जिम्मेदार विभाग दावे करते हों, लेकिन तेंदूखेड़ा ब्लॉक के सर्रा-कूदपुरा मार्ग पर ब्यारमा नदी का पुल इन दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है। पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए पुल की लोक निर्माण विभाग द्वारा मरम्मत कराई गई, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार मरम्मत के बाद भी पुल बड़े वाहनों के लिए सुरक्षित नहीं हो पाया है। यही वजह है कि करीब एक माह से बसों का आवागमन पुल के दूसरी ओर बसे गांवों तक बंद है।

पुल के दूसरी ओर कूदपुरा, बोरिया, देवरीखेड़ा और सनाई सहित करीब आधा दर्जन गांव बसे हैं। इन गांवों की आबादी करीब 300 से 400 के बीच बताई जा रही है। बस सेवा बंद होने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए पहले निजी साधन या छोटे वाहनों से सर्रा पहुंचना पड़ता है, इसके बाद वहां से बस पकड़कर तेंदूखेड़ा, झलोन, तारादेही सहित अन्य स्थानों तक जाना पड़ता है।

बस संचालकों को हादसे का डर

ग्रामीणों का कहना है कि पुल की मरम्मत तो कराई गई, लेकिन इसकी स्थिति अभी भी बड़े वाहनों के लिए भरोसेमंद नहीं है। बस संचालक भी पुल से बस निकालने में जोखिम महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि पुल पार करते समय कोई हादसा होता है और वाहन नदी में गिरता है तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी आशंका के चलते बसों का संचालन फिलहाल सर्रा तक ही सीमित है।

ग्रामीणों के अनुसार करीब एक माह पहले तक कूदपुरा में पांच से छह बसें रात में रुकती थीं, लेकिन अब एक भी बस गांव तक नहीं पहुंच रही है। इससे स्कूली विद्यार्थियों, मजदूरों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से बाहर जाने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गरीब ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें

बस सेवा बंद होने का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक कई लोगों को 8 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलकर सर्रा पहुंचना पड़ रहा है। वहीं, छोटे वाहन और ऑटो चालकों द्वारा मजबूरी का फायदा उठाकर अधिक किराया वसूलने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है।

राशन सामग्री के परिवहन में भी परेशानी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन दुकान तक पहुंचने वाले वाहन पूरा सामान गांव तक नहीं ला पा रहे हैं। कई बार ग्रामीणों को आधा-आधा राशन लेकर आना पड़ता है, जिससे समय और परिवहन दोनों का अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है।

केवल छोटे वाहन ही निकल पा रहे

ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में ऑटो और दोपहिया वाहन ही किसी तरह पुल से निकल पा रहे हैं। बड़े वाहनों के लिए पुल की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने पुल का तकनीकी निरीक्षण कराकर उसकी मजबूती की जांच कराने और आवश्यकता होने पर दोबारा सुधार कार्य कराने की मांग की है, ताकि बसों सहित बड़े वाहनों का आवागमन फिर से शुरू हो सके।

विभाग को बसों के बंद होने की जानकारी नहीं

मामले को लेकर लोक निर्माण विभाग की एसडीओ मनीष मंगोलिया से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान पुल क्षतिग्रस्त हुआ था और विभाग द्वारा उसका सुधार कराया गया है। बसें पुल से क्यों नहीं जा पा रही हैं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक सुधार कार्य कराया गया है।

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