निजी वाहन पर ‘मध्यप्रदेश शासन’ लिखे जाने को लेकर उठे सवाल, कनिष्ठ अभियंता के वाहन की जांच की मांग

तेंदूखेड़ा। हर्रई-तेजगढ़ विद्युत वितरण केंद्र में पदस्थ कनिष्ठ अभियंता के निजी वाहन पर ‘मध्यप्रदेश शासन’ लिखे होने को लेकर क्षेत्र में सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने संबंधित वाहन की जांच कराने और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग शासन-प्रशासन से की है।
जानकारी के अनुसार विद्युत विभाग में पूर्व में अनुबंध पर लगाए गए वाहन क्रमांक MP20GB 4085 को अनुबंध समाप्त होने के बाद कनिष्ठ अभियंता शिव दयाल अहिरवार, निवासी तेंदूखेड़ा, द्वारा खरीदे जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि उक्त वाहन का उपयोग वे तेंदूखेड़ा स्थित निजी निवास से हर्रई विद्युत वितरण केंद्र तक आने-जाने के लिए करते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाहन के आगे नंबर प्लेट के ऊपर तथा पीछे के हिस्से में ‘मध्यप्रदेश शासन’ लिखा हुआ है। लोगों का कहना है कि निजी वाहन पर इस प्रकार सरकारी पहचान प्रदर्शित किए जाने से आम लोगों में वाहन के शासकीय होने का भ्रम उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने संबंधित विभाग और परिवहन अधिकारियों से वाहन की वैधानिक स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर ‘मध्यप्रदेश शासन’ लिखा वाहन देखकर कई चालक उसे शासकीय वाहन समझकर रास्ता देते हैं और ओवरटेक करने से भी बचते हैं। लोगों ने यह भी आशंका जताई कि ऐसी पहचान का अनुचित लाभ उठाया जा सकता है जैसे टोल टैक्स पर पेट्रोल पम्प पर सड़क की आर टी ओ की चेकिंग में इस वाहन से इनके मित्र परिवार के लोग अवैध कार्यो में इस्तेमाल क़र सकते हैहालांकि, इन आशंकाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं हर्रई के कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उक्त निजी वाहन को विद्युत वितरण केंद्र के उस क्षेत्र में भी खड़ा किया जाता है, जहां सामान्य निजी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित बताया जाता है। उनका कहना है कि विद्युत उपकेंद्र परिसर में हाई-वोल्टेज उपकरण और ट्रांसफार्मर लगे होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से प्रवेश के नियम स्पष्ट होने चाहिए।
स्थानीय लोगों ने शासन से मांग की है कि वाहन क्रमांक MP20GB 4085 की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि वह वर्तमान में निजी वाहन है या किसी शासकीय अनुबंध/कार्य से संबद्ध है। साथ ही वाहन पर ‘मध्यप्रदेश शासन’ लिखे जाने की वैधानिकता, परिसर में उसके प्रवेश तथा पार्किंग की अनुमति की भी जांच की जाए।
कनिष्क अभियंता शिवदयाल अहिरवार को फोन लगाया तो उन्होंने फोन नही उठाया
