सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा बना मुसीबत, रोज हो रहे हादसे; संजय जैन ने कहा—तेंदूखेड़ा की गोशाला में भेजे जाएं मवेशी

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तेंदूखेड़ा। तेंदूखेड़ा तहसील क्षेत्र के प्रमुख मार्गों और पुलों पर शाम होते ही बड़ी संख्या में आवारा एवं बेसहारा मवेशियों का जमावड़ा लगने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। शाम करीब 5 बजे से सुबह 6 बजे तक कई स्थानों पर सड़कें मवेशियों के कारण बाधित रहती हैं। तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है।
तेंदूखेड़ा तहसील के 27 मिल, सेलबाड़ा, बगदरी, सांगा, कंसा, समनापुर और तारादेही सहित सड़क किनारे बसे कई गांवों में यह समस्या सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी संख्या में मवेशी शाम होते ही जंगलों से निकलकर सड़कों पर आ जाते हैं।
सांगा में दर्जनों मवेशियों का जमावड़ा


ग्राम सांगा के सरपंच नितिन जैन ने बताया कि गांव में दर्जनों मवेशी सड़कों पर बैठे रहते हैं। इनमें कुछ स्थानीय मवेशी हैं, जबकि कुछ मवेशियों को बाहर से वाहनों के माध्यम से लाकर कंसा के आसपास छोड़े जाने की बात सामने आती है। कंसा से सांगा के बीच जंगल क्षेत्र होने के कारण मवेशी दिन में जंगल में रहते हैं और शाम होते ही सड़क पर आ जाते हैं।
इसी तरह 27 मिल के ग्रामीणों ने बताया कि चौराहे के आसपास सैकड़ों मवेशियों का जमावड़ा रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें कई मवेशी आसपास के गांवों के नहीं हैं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों से लाकर जंगल में छोड़ दिए जाते हैं।
सेलबाड़ा में भी सड़क पर मवेशियों का कब्जा
सेलबाड़ा में भी बड़ी संख्या में मवेशियों के सड़कों पर बैठे रहने की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार इनमें कई मवेशी पाटन क्षेत्र की ओर से लाए जाने की बात कही जा रही है। शाम होते ही मवेशियों के सड़क पर आ जाने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।


स्थानीय संगठनों का कहना है कि पाटन, हवेली और जावेरा क्षेत्र में खेती का रकबा अधिक होने के कारण मवेशियों के लिए पर्याप्त चराई की जगह नहीं बची है। खेती के काम में मशीनों के बढ़ते उपयोग से बैलों की उपयोगिता भी कम हुई है। ऐसे में कई पशु मालिक अपने अनुपयोगी मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं।
स्टेट हाईवे पर हादसों का खतरा
तेंदूखेड़ा तहसील से सागर-जबलपुर स्टेट हाईवे तथा दमोह-जबलपुर मार्ग गुजरता है। इन मार्गों पर दिन-रात तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही रहती है। सड़क पर बैठे मवेशियों के अचानक वाहन के सामने आने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई बार मवेशी सड़क हादसों में घायल होने या मौत का शिकार भी हो जाते हैं।
क्षेत्र में आवारा एवं बेसहारा मवेशियों के संरक्षण के लिए झालोन, सेलबाड़ा, हर्रई और तेजगढ़ सहित विभिन्न स्थानों पर सरकारी गोशालाएं संचालित हैं। हालांकि कुछ गोशालाओं में क्षमता से अधिक मवेशी होने के कारण नए पशुओं को रखने में परेशानी बताई जा रही है। ग्राम पंचायत बासी और सांगा में बनी गोशालाएं वर्तमान में संचालित नहीं हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन गोशालाओं का संचालन शुरू किया जाए तो आसपास के मवेशियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। तेंदूखेड़ा और धनगोर में निजी गोशालाएं भी संचालित हैं।
संजय जैन ने कलेक्टर से किया गोशाला में मवेशी रखने का आग्रह
दयोदय श्री विद्यासागर महाराज पशु सेवा केंद्र के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि उनकी गोशाला लंबे समय से संचालित है और पर्याप्त क्षेत्र में बनी हुई है। वर्तमान में यहां करीब तीन हजार से अधिक गायें रह रही हैं तथा लगभग इतनी ही क्षमता में और पशुओं को रखने की व्यवस्था उपलब्ध है।


संजय जैन ने बताया कि उन्होंने वर्तमान कलेक्टर से आग्रह किया है कि तेंदूखेड़ा तहसील क्षेत्र में सड़कों और जंगलों में घूम रहे आवारा मवेशियों को उनकी गोशाला में भेजने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि गोशाला में इन पशुओं की देखभाल की जा सकती है। इससे एक ओर सड़क पर मवेशियों के कारण होने वाली परेशानी खत्म होगी, वहीं दूसरी ओर बेजुबान पशुओं को सड़क हादसों से बचाया जा सकेगा।


मवेशियों के अवैध परिवहन की भी जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि जंगलों में घूम रहे कुछ मवेशियों को असामाजिक तत्व वाहनों में भरकर दूसरे स्थानों पर ले जाते हैं तथा उनके अवैध व्यापार की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, सड़कों से मवेशियों को हटाने, बंद पड़ी गोशालाओं को शुरू कराने और पशुओं के संरक्षण की ठोस व्यवस्था करने की मांग की है।

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