विश्व आदिवासी दिवस मुख्य समारोह जिलास्तरीय दमोह में मनाया गया

दमोह में धूमधाम से मनाया गया ‘विश्व आदिवासी दिवस’ और ‘स्वाभिमान महासम्मेलन’
दिखावे और कुरीतियों से परे, शिक्षा, स्व-रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण से ही समृद्ध होगा गोंडवाना: गोंड समाज महासभा
दमोह (मध्य प्रदेश)।
गोंड समाज महासभा, जिला कमेटी दमोह के तत्वावधान में आज रामकुमार स्कूल (कोतवाली के पास, दमोह) में ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के अवसर पर भव्य “स्वाभिमान एवं जनजागृति महासम्मेलन” का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम प्रातः 11:00 बजे से सायं 4:30 बजे तक चला, जिसमें जिलेभर से हजारों सगा जनों और समाजबंधुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सांस्कृतिक विरासत और पूर्वजों के बलिदान का स्मरण
सम्मेलन की शुरुआत ‘जय सेवा, जय जोहार’ के उद्घोष से हुई। वक्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1994 से मनाए जा रहे विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन अपनी जड़ों को पहचानने, प्रकृति संरक्षण में आदिवासियों के योगदान को रेखांकित करने और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प लेने का अवसर है।
गोंडवाना साम्राज्य के महान सम्राट महाराजा संग्राम शाह, राजा दलपत शाह, महारानी दुर्गावती के अदम्य साहस और अमर शहीद शंकर शाह–रघुनाथ शाह के बलिदान को याद करते हुए वक्ताओं ने समाज को अपने गौरवशाली इतिहास से सीख लेने की प्रेरणा दी।
मुख्य विचार: “आज़ादी से आज तक : क्या खोया, क्या पाया?”
कार्यक्रम के दौरान “आज़ादी से आज तक : क्या खोया, क्या पाया? — आत्मचिंतन, आत्ममंथन और भविष्य का संकल्प” विषय पर गहन परिचर्चा हुई।

वक्ताओं ने समाज के समक्ष प्रस्तुत यक्ष प्रश्नों—गोंडी भाषा के संरक्षण, गढ़-किलों व धरोहरों की सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने—पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिवर्तन की शुरुआत आत्ममंथन से ही होती है।
‘दिखावा घटाएँ — शिक्षा और स्व-रोजगार अपनाएँ’ का संकल्प
सम्मेलन में सर्वसम्मति से आह्वान किया गया कि समाज को बाहरी दिखावे और कुरीतियों पर होने वाले अनावश्यक खर्चों को रोककर शिक्षा, पुस्तकालय, छात्रावास, प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन, डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास पर निवेश करना चाहिए।
युवाओं के लिए स्व-रोजगार के महत्व पर जोर देते हुए जैविक खेती, कृषि, लघु वनोपज, बांस एवं वन-आधारित हस्तशिल्प, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पर्यटन और डिजिटल उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। “दिखावा कुछ क्षणों की तालियाँ देता है, लेकिन शिक्षा पीढ़ियों का भविष्य बदल देती है।”
अतिथि एवं गणमान्य जन
- मुख्य अतिथि:
- तिरु नारायण सिंह ठाकुर (रिटायर्ड अपर कलेक्टर)तिरु बबीता सिंह पोर्ते सभापति, जिला पंचायत सदस्य विशिष्ट अतिथि: तिरु कौशल सिंह पोर्ते (प्रदेश सह सचिव) तिरु प्रकाश सिंह धुर्वे (प्रदेश सह सचिव, भुमका प्रकोष्ठ) तिरु सीताराम सिंह कुलस्ते (एडवोकेट, प्रदेश सह सचिव) तिरु उमराव सिंह ठाकुर (रिटायर्ड एसडीओपी & ब्लॉक संरक्षक, जबेरा) भुमका प्रकोष्ठ अतिथि: दादा तिरु शंकर शाह तेकाम (कार्यवाहक जिलाध्यक्ष) तिरू जीवन सिंह तेकाम (जिला सचिव) एवं समस्त भुमका मंडल व ब्लॉक कमेटी। अध्यक्षता संभागीय कार्यवाहक अध्यक्ष तिरु लखन सिंह मरकाम तिरु धीरज सिंह सरूता जिलाध्यक्ष, दमोह प्रमुख आयोजक व निवेदक
कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला सचिव सीताराम सोयाम, मीडिया प्रभारी सुनील शाह एडाली, सह सचिव महेश सिंह करपेती, उपाध्यक्ष शिवलाल धुर्वे, जग्गन सिंह पहलवान, भज्जू सिंह एडाली, छोटे सिंह पोर्ते, कोषाध्यक्ष राजाराम सोयाम, पूर्व जिलाध्यक्ष कंछेदी सिंह उर्रेती, महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी तेकाम, श्रीमती पूजा ठाकुर, युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष अनरत सिंह एडाली, महेंद्र सिंह मरकाम, आशैप्र जिलाध्यक्ष मुंशीलाल तेकाम, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष चन्द्रमान सिंह तेकाम, विश्वनाथ सिंह धुर्वे, ब्लॉक अध्यक्ष जबेरा महाराज सिंह फौजी, डोमन सिंह मरावी (दमोह), रूप सिंह ठाकुर (तेंदूखेड़ा), कमल सिंह ठाकुर (बटियागढ़), मानसिंह ठाकुर (पटेरा), संतोष सिंह ठाकुर (हटा), महिला प्रकोष्ठ ब्लॉक अध्यक्ष बैजयंती ठाकुर, सुनीता ठाकुर, दीप्ति ठाकुर, बेनी सिंह ठाकुर, राजाराम सिंह धुर्वे, मोहन सिंह तेकाम, निरंजन सिंह ठाकुर, हरप्रसाद धुर्वे, बबलू सिंह दीवान, राजेन्द्र सिंह, राजू सिंह मरकाम, सोने सिंह ठाकुर सहित हजारों समाजसेवियों एवं पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका रहीजारीकर्ता:
