जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर 39 बच्चे, दो वर्षों से नहीं हुई मरम्मत

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तेंदुखेड़ा (दमोह)। तेंदुखेड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत खमरिया शिवलाल के आश्रित ग्राम पिडरई स्थित प्राथमिक शाला का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इसके बावजूद करीब 39 बच्चे प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल के कई कमरों की छत का प्लास्टर गिर चुका है, सरिया बाहर दिखाई देने लगी है और बीम तक चटक गई है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी खतरनाक हो गई है।

शाला परिसर में कुल चार कमरे हैं, जिनमें एक कार्यालय के लिए उपयोग होता है। शेष तीन कमरों में कक्षाएं संचालित की जाती हैं। इनमें से एक कमरा पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका है। उसकी छत का अधिकांश सीमेंट गिर गया है तथा बीम में दरारें आ गई हैं। उसके समीप स्थित दूसरे कमरे की छत से लगातार प्लास्टर झड़ रहा है और सरिया खुल चुकी है। इसी जर्जर कमरे में कक्षा पहली से तीसरी तक के बच्चे बैठते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

एक अन्य अतिरिक्त कक्ष में कक्षा चौथी एवं पांचवीं के विद्यार्थी बैठते हैं, लेकिन इस कमरे में भी जर्जरता के संकेत दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में पूरे स्कूल भवन की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।

संस्था प्रभारी श्रीराम पाल ने बताया कि वर्तमान में विद्यालय में 39 विद्यार्थियों का प्रवेश हो चुका है और प्रवेश प्रक्रिया अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि भवन पूरी तरह जर्जर है और बच्चों को बैठाना सुरक्षित नहीं है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण मजबूरी में कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं। विद्यालय भवन की स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को कई बार भेजी जा चुकी है, लेकिन पिछले लगभग दो वर्षों से कोई सुधार कार्य नहीं कराया गया।

ग्रामीण गिरधारी परस्ते, बृजेश परस्ते सहित अन्य लोगों ने बताया कि बारिश के दौरान कमरों की छत से लगातार पानी टपकता है। बच्चे गीली जगहों पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कई बार सरपंच से कम से कम एक कमरे की मरम्मत कराने का अनुरोध किया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें हमेशा डर बना रहता है कि कहीं अचानक छत या दीवार गिरने से बड़ा हादसा न हो जाए।

ग्राम पंचायत के प्रभारी सचिव राम कुमार अहिरवार ने बताया कि विद्यालय भवन के जर्जर होने की जानकारी जनपद पंचायत के अधिकारियों को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि सरपंच के साथ विद्यालय का निरीक्षण कर अपने स्तर पर जो संभव होगा, वह प्रयास किया जाएगा।

गौरतलब है कि पूर्व कलेक्टर सुधीर कोचर ने जिले के कई जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए गौण खनिज मद से राशि उपलब्ध कराई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मरम्मत की व्यवस्था शासन स्तर पर उपलब्ध है, तो पिडरई का यह विद्यालय आज भी जर्जर हालत में क्यों है? यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल भवन की मरम्मत अथवा नए भवन की व्यवस्था कराने की मांग की है।

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