जंगल के रखवाले ही बने सवालों के घेरे में, जब्त सागौन की लकड़ी से पलंग बनवाने के आरोप

तेंदूखेड़ा। वनों की सुरक्षा के लिए नियुक्त कर्मचारियों पर ही यदि वन संपदा के दुरुपयोग के आरोप लगने लगें, तो यह पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा ही मामला दमोह जिले के तेंदूखेड़ा से लगभग 25 किलोमीटर दूर तारादेही वन परिक्षेत्र की बरबटा बीट से सामने आया है, जहां बीट गार्ड और वन चौकीदारों पर जब्त सागौन की लकड़ी से निजी उपयोग के लिए पलंग बनवाने के आरोप लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, बरबटा गांव निवासी बेंजु आदिवासी ठाकुर, जो बढ़ई का कार्य करते हैं, अपने घर के आंगन में दिनदहाड़े सागौन की लकड़ी से दो पलंग तैयार कर रहे थे। मौके पर बड़ी संख्या में सागौन की बल्लियां रखी हुई थीं। पूछताछ में बढ़ई ने दावा किया कि करीब छह दिन पहले बरबटा बीट के वन चौकीदार हल्के भाई और अभिषेक स्वयं यह लकड़ी देकर गए थे तथा पलंग तैयार करने का आदेश दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होगी।
बढ़ई ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले तत्कालीन बीट गार्ड सुरेंद्र सिंह अहिरवार के लिए भी सागौन की लकड़ी से पलंग तैयार किया था और उस समय भी लकड़ी विभागीय कर्मचारियों द्वारा ही उपलब्ध कराई गई थी।
वहीं, नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक वन चौकीदार ने दावा किया कि यह लकड़ी लगभग आठ माह पहले जब्त की गई थी, जिसे नियमानुसार डिपो भेजने के बजाय सीधे चौकी से बढ़ई के घर पहुंचा दिया गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण कराने, विभागीय लापरवाही और वन संपदा के दुरुपयोग जैसी अनियमितताएं लंबे समय से चल रही हैं। उनका कहना है कि वन परिक्षेत्र अधिकारी के स्तर पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से कर्मचारियों के मनोबल बढ़ गए हैं और नियमों की अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई, जब्त लकड़ी के रिकॉर्ड की जांच तथा वन क्षेत्र में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
तारादेही वन परिक्षेत्र अधिकारी देवेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया है कि में अभी मौके पर भेजकर कार्यवाही करवाता है।वीट गार्ड सुरेंद्र सिंह की पहले भी कई बार लापरवाहियों सामने आई है उसकी सूचना सीनियर अदिकारियो को भेज दी है जल्द कार्यवाही की जाएगी
