दो कमरों में सिमटी आठ कक्षाएं: हर्रई की एकीकृत माध्यमिक शाला में 148 बच्चों का भविष्य संकट में

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तेंदूखेड़ा (दमोह)। तेंदूखेड़ा विकासखंड की अधिकांश शासकीय स्कूलों की जर्जर इमारतें बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्राम पंचायत चंदना के हर्रई स्थित एकीकृत माध्यमिक शाला इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गई है, जहां कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई केवल दो कमरों में संचालित की जा रही है। विद्यालय के आठ कमरे जर्जर होकर गिर चुके हैं या गिरने की स्थिति में हैं, जिसके कारण 148 से अधिक विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना शिक्षकों की मजबूरी बन गया है।

विद्यालय के प्राचार्य राजीव प्रसाद साहू ने बताया कि स्कूल में लगातार नए प्रवेश हो रहे हैं, लेकिन पर्याप्त कक्ष नहीं होने से सभी कक्षाओं का संचालन दो कमरों में करना पड़ रहा है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और शिक्षक भी प्रभावी ढंग से शिक्षण कार्य नहीं कर पा रहे हैं।

वर्षों से नहीं हुई मरम्मत, भवन बने हादसे का कारण

प्राचार्य के अनुसार विद्यालय की पुरानी कच्ची इमारत वर्षों पहले क्षतिग्रस्त हो गई थी। समय रहते मरम्मत नहीं होने के कारण अब उसकी दीवारें पूरी तरह खोखली हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं। इसके अलावा वर्ष 2013-14 में निर्मित बड़े हॉल की बीम झुक गई है, छत से पानी टपकता है तथा प्लास्टर गिर रहा है, जिससे बरसात के मौसम में वहां बच्चों को बैठाना जोखिम भरा हो गया है।

तीन कमरों वाले एक अन्य पक्के भवन के दो कमरों की छत गिर चुकी है, जबकि तीसरा कमरा भी गिरने की कगार पर है। वहीं आंगनबाड़ी के लिए बने दो कमरों की बीम भी झुक चुकी है और वहां भी छत से पानी रिसने एवं प्लास्टर गिरने की समस्या बनी हुई है।

अधिकारियों को कई बार दिया आवेदन, नहीं हुई कार्रवाई

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि जिला कलेक्टर, एसडीएम, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी सहित ग्राम पंचायत स्तर तक कई बार आवेदन और प्रतिवेदन दिए जा चुके हैं। पूर्व एवं वर्तमान कलेक्टर द्वारा आश्वासन भी मिला, लेकिन अब तक भवनों की मरम्मत या नए निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे न केवल तंग कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं, बल्कि मध्याह्न भोजन भी पर्याप्त स्थान के अभाव में जर्जर बरामदे में करना पड़ता है। ग्रामीणों ने शासन पर बच्चों की सुरक्षा की अनदेखी का आरोप लगाया है और तत्काल नए भवन निर्माण की मांग की है।

बाउंड्री वॉल नहीं, स्कूल में पहुंचते हैं असामाजिक तत्व

विद्यालय परिसर में चारदीवारी नहीं होने से रात के समय मवेशियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। सुबह स्कूल खुलने पर शिक्षकों को गोबर साफ करना पड़ता है तथा शराब की खाली बोतलें उठानी पड़ती हैं। इससे विद्यालय का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है और बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन ने शासन एवं प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवनों को तत्काल ध्वस्त कर नए भवनों का निर्माण कराया जाए तथा बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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