जर्जर छात्रावास भवन में बच्चों की सुरक्षा पर संकट, हादसे की आशंका से सीमित किए जा रहे प्रवेश

0
Spread the love

तेन्दूखेड़ा। आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा, आवास और सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र एवं मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित छात्रावास योजनाओं पर तेन्दूखेड़ा में जर्जर भवन सवाल खड़े कर रहा है। जबलपुर रोड स्थित मवला पुल के पास संचालित शासकीय विकासखंड स्तरीय उत्कृष्ट बालक शिक्षण संस्थान (50 सीटर छात्रावास) की इमारत अत्यंत जर्जर हो चुकी है, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।

करीब 20 वर्ष पुराने इस भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। जानकारी के अनुसार एक-दो कमरों की छत पहले ही गिर चुकी है, कई स्थानों पर छत का प्लास्टर उखड़ गया है और सरिया बाहर दिखाई देने लगी है। भवन की दीवारों में गहरी दरारें हैं, छतों में क्रैक पड़ चुके हैं तथा फर्श भी जगह-जगह से उखड़ रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और दीवारों में सीलन आने से भवन और अधिक कमजोर होता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे जर्जर भवन में छात्रावास का संचालन बच्चों की सुरक्षा के साथ बड़ा जोखिम है। उनका कहना है कि लगातार बारिश की स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, इसलिए छात्रावास को तत्काल किसी सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

कम भवन क्षमता के कारण सीमित किए जा रहे प्रवेश

छात्रावास अधीक्षक रजत चौहान ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए इस वर्ष अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भवन की स्थिति से विभाग को समय-समय पर अवगत कराया जाता रहा है। कुछ कमरों की मरम्मत कराई गई है और फिलहाल तीन सुरक्षित कमरों में छात्रावास संचालित किया जा रहा है। छात्रावास को अन्य भवन में स्थानांतरित करने के लिए जिला स्तर पर प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि गर्मी में पानी की समस्या और बारिश के दौरान भवन में हादसे की आशंका बनी रहती है।

विभाग को कराया जा रहा अवगत

अनुविभागीय अधिकारी सी. जी. गोस्वामी ने बताया कि जर्जर भवन की स्थिति से आदिम जाति कल्याण विभाग को अवगत कराया जा रहा है और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

बड़ा सवाल

सरकार आदिवासी विद्यार्थियों के लिए बेहतर शिक्षा और सुरक्षित आवास की व्यवस्था करने का दावा करती है, लेकिन तेन्दूखेड़ा का यह जर्जर छात्रावास इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार विभाग बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए छात्रावास को कब तक सुरक्षित भवन में स्थानांतरित करता है।

About The Author

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!