प्राकृतिक खेती अपनाने किसानों को दिया गया एक दिवसीय प्रशिक्षण, जैविक खेती के बताए फायदे

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दमोह। मानव जीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह के मार्गदर्शन में उद्यानिकी विभाग, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की आत्मा परियोजना तथा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) दमोह के सहयोग से किसानों के लिए प्राकृतिक खेती (नेचुरल फार्मिंग) विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार अहिरवाल ने किसानों को प्राकृतिक खेती की अवधारणा, उसके लाभ एवं अपनाई जाने वाली विभिन्न तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती ऐसी कृषि पद्धति है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती की जाती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र, अग्नियास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग किया जाता है। साथ ही मल्चिंग, फसल चक्र (क्रॉप रोटेशन) एवं पशुधन के एकीकरण जैसी तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बीज उपचार, जैविक पोषण, प्राकृतिक कीट नियंत्रण, मल्चिंग के लाभ तथा प्राकृतिक खेती की लोकप्रिय जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग पद्धति के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

मानव जीवन विकास समिति के ब्लॉक समन्वयक घनश्याम प्रसाद रायकवार ने बताया कि संस्था विभिन्न शासकीय विभागों की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जनजागरूकता के लिए लगातार कार्य कर रही है। समिति के कार्यकर्ता गांव-गांव में पीजी ग्रुप एवं ग्राम विकास समितियों की बैठकों के माध्यम से किसानों और ग्रामीणों को शासन की योजनाओं तथा प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की तथा इसे अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया।

दमोह। मानव जीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह के मार्गदर्शन में उद्यानिकी विभाग, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की आत्मा परियोजना तथा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) दमोह के सहयोग से किसानों के लिए प्राकृतिक खेती (नेचुरल फार्मिंग) विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार अहिरवाल ने किसानों को प्राकृतिक खेती की अवधारणा, उसके लाभ एवं अपनाई जाने वाली विभिन्न तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती ऐसी कृषि पद्धति है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती की जाती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र, अग्नियास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग किया जाता है। साथ ही मल्चिंग, फसल चक्र (क्रॉप रोटेशन) एवं पशुधन के एकीकरण जैसी तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बीज उपचार, जैविक पोषण, प्राकृतिक कीट नियंत्रण, मल्चिंग के लाभ तथा प्राकृतिक खेती की लोकप्रिय जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग पद्धति के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

मानव जीवन विकास समिति के ब्लॉक समन्वयक घनश्याम प्रसाद रायकवार ने बताया कि संस्था विभिन्न शासकीय विभागों की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जनजागरूकता के लिए लगातार कार्य कर रही है। समिति के कार्यकर्ता गांव-गांव में पीजी ग्रुप एवं ग्राम विकास समितियों की बैठकों के माध्यम से किसानों और ग्रामीणों को शासन की योजनाओं तथा प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की तथा इसे अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया।

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