पैसे लेकर बीटगार्ड ने 30 फीट खिसकवाया मुनारा, एक एकड़ वन भूमि नक्शे से बाहर होने का आरोप

तेंदूखेड़ा। वन विभाग जहां अपनी एक इंच भूमि की सुरक्षा के लिए सख्त कानूनों का पालन करवाता है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है, वहीं दमोह वन मंडल के तारादेही वन परिक्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि बरपटा बीट में पदस्थ बीटगार्ड की मिलीभगत से वन भूमि का मुनारा (सीमा चिन्ह) 30 फीट खिसकाकर करीब एक एकड़ जमीन को वन क्षेत्र से बाहर कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, तारादेही रेंज की बरपटा बीट स्थित झपान नाला के समीप कुछ परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। यहां राजस्व भूमि के साथ लगी वन भूमि पर भी कुछ लोगों द्वारा खेती की जा रही है। इसी बीच अतिक्रमण करने वाले राजू रैकवार ने दावा किया है कि वन भूमि पर कब्जा करने के लिए उसने चौकीदार हल्ले, अभिषेक तथा बीटगार्ड सुरेंद्र अहिरवार को कुल दस हजार रुपये दिए थे। उसके बाद कथित रूप से मुनारे को लगभग 30 फीट ऊपर खिसका दिया गया, जिससे संबंधित भूमि वन विभाग के नक्शे से बाहर हो गई और उस पर खेती की जाने लगी।

राजू रैकवार का यह भी आरोप है कि इसके बाद हर वर्ष दारू-मुर्गा और अन्य खर्चों के नाम पर हजार,पांच सौ रुपये देने पड़ते हैं। आरोप है कि चौकीदारों और बीटगार्ड की मिलीभगत से करीब एक एकड़ वन भूमि को अवैध रूप से कब्जे में लेकर खेती की जा रही है।

इस मामले में बीटगार्ड सुरेंद्र अहिरवार ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी से कोई पैसा नहीं लिया है और वे उस स्थान पर गए भी नहीं हैं।
वहीं, वन परिक्षेत्र अधिकारी देवेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद मौके पर विभागीय स्टाफ भेजकर जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला वन भूमि की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है, क्योंकि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर वन संपदा की रक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर वन भूमि को नुकसान पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। अब सबकी निगाहें विभागीय जांच और उसके परिणाम पर टिकी हुई हैं।
