मानसून की आहट, फिर भी बेखबर नगर परिषद; नाले-नालियां नहीं हुईं साफ, जलभराव का खतरा बढ़ा

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तेंदुखेड़ा। मानसून की दस्तक से पहले जहां अधिकांश नगर निगम और नगर परिषद अपने क्षेत्रों के नालों और नालियों की साफ-सफाई कर जलभराव से निपटने की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं नगर परिषद तेंदुखेड़ा अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाती नजर नहीं आ रही है। नगर के कई मुख्य नाले और नालियां कचरे से भरे पड़े हैं, जिससे बारिश के दौरान गंभीर जलभराव की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है।

जबलपुर रोड स्थित हाई स्कूल के पास बने मुख्य नाले में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा फंसा हुआ है, जिससे विद्यानगर, बस स्टैंड तथा वार्ड क्रमांक 9 और 10 का पानी आसानी से आगे नहीं निकल पाता। बारिश के दौरान यहां सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी भर जाता है और आसपास के निचले मकानों में पानी घुसने से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

इसी प्रकार विद्यानगर स्थित होंडा एजेंसी के सामने भी जलभराव की समस्या हर वर्ष बनी रहती है। वार्ड क्रमांक 9 और खेतों से आने वाला पानी छोटी नालियों के कारण तेजी से निकासी नहीं कर पाता, जिससे सड़क और मकानों में तीन से चार फीट तक पानी भर जाता है।

तारादेही रोड पर विश्वकर्मा मंदिर से न्यायालय के सामने तक बने नाले में भी कचरा जमा होने तथा पुलिया ऊंची होने के कारण पानी का बहाव बाधित होता है। परिणामस्वरूप न्यायालय परिसर तक में जलभराव की स्थिति बन जाती है।

वार्ड क्रमांक 12 की नई बस्ती में सड़क और नाली का अभाव है। स्थानीय निवासी धनी ठाकुर, दीप्पू रैकवार, हल्के भाई, अभिषेक सेन और भूरा साहू ने बताया कि बारिश के दिनों में उनके घरों के सामने तीन माह तक पानी भरा रहता है, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है।

वहीं ग्राम चोरई के वार्ड क्रमांक 13, 14 और 15 में खेर माता मंदिर से मुख्य मार्ग तक बनी नाली कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है और सफाई नहीं होने के कारण जाम पड़ी है। ग्रामीण लक्ष्मण घोषी, अशोक घोषी और सर्जन घोषी ने बताया कि छोटी पुलिया और नाली की खराब स्थिति के कारण पानी सड़कों और घरों में घुस जाता है तथा गांव की गलियों में कीचड़ फैलने से लोगों और स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वार्ड क्रमांक 9 में मंडी परिसर के पास शंकर मंदिर वाली गली में भी नाली मुख्य नाली से नीचे होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पाती और बारिश का पानी लोगों के घरों में प्रवेश कर जाता है।

नगर के कई अन्य क्षेत्रों में भी हर वर्ष जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद बारिश शुरू होने के बाद ही सक्रिय होती है। उनका कहना है कि जब यह समस्या हर साल सामने आती है तो इसके स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास क्यों नहीं किए जाते।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी केवल नाम मात्र के लिए रह गए हैं और अब लोगों की उम्मीदें भी उनसे उठती जा रही हैं। ऐसे में नगरवासी मानसून के बीच किसी बड़ी परेशानी से बचने के लिए भगवान भरोसे ही हैं।
नगर के सफ़ाई प्राभारी प्रदीप साहू ने बताया है कि बारी बारी से सफाई चालू है और वारिश होने दो एक दिन में सब कुछ सही हो जाएगा

तेंदुखेड़ा। मानसून की दस्तक से पहले जहां अधिकांश नगर निगम और नगर परिषद अपने क्षेत्रों के नालों और नालियों की साफ-सफाई कर जलभराव से निपटने की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं नगर परिषद तेंदुखेड़ा अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाती नजर नहीं आ रही है। नगर के कई मुख्य नाले और नालियां कचरे से भरे पड़े हैं, जिससे बारिश के दौरान गंभीर जलभराव की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है।

जबलपुर रोड स्थित हाई स्कूल के पास बने मुख्य नाले में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा फंसा हुआ है, जिससे विद्यानगर, बस स्टैंड तथा वार्ड क्रमांक 9 और 10 का पानी आसानी से आगे नहीं निकल पाता। बारिश के दौरान यहां सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी भर जाता है और आसपास के निचले मकानों में पानी घुसने से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

इसी प्रकार विद्यानगर स्थित होंडा एजेंसी के सामने भी जलभराव की समस्या हर वर्ष बनी रहती है। वार्ड क्रमांक 9 और खेतों से आने वाला पानी छोटी नालियों के कारण तेजी से निकासी नहीं कर पाता, जिससे सड़क और मकानों में तीन से चार फीट तक पानी भर जाता है।

तारादेही रोड पर विश्वकर्मा मंदिर से न्यायालय के सामने तक बने नाले में भी कचरा जमा होने तथा पुलिया ऊंची होने के कारण पानी का बहाव बाधित होता है। परिणामस्वरूप न्यायालय परिसर तक में जलभराव की स्थिति बन जाती है।

वार्ड क्रमांक 12 की नई बस्ती में सड़क और नाली का अभाव है। स्थानीय निवासी धनी ठाकुर, दीप्पू रैकवार, हल्के भाई, अभिषेक सेन और भूरा साहू ने बताया कि बारिश के दिनों में उनके घरों के सामने तीन माह तक पानी भरा रहता है, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है।

वहीं ग्राम चोरई के वार्ड क्रमांक 13, 14 और 15 में खेर माता मंदिर से मुख्य मार्ग तक बनी नाली कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है और सफाई नहीं होने के कारण जाम पड़ी है। ग्रामीण लक्ष्मण घोषी, अशोक घोषी और सर्जन घोषी ने बताया कि छोटी पुलिया और नाली की खराब स्थिति के कारण पानी सड़कों और घरों में घुस जाता है तथा गांव की गलियों में कीचड़ फैलने से लोगों और स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वार्ड क्रमांक 9 में मंडी परिसर के पास शंकर मंदिर वाली गली में भी नाली मुख्य नाली से नीचे होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पाती और बारिश का पानी लोगों के घरों में प्रवेश कर जाता है।

नगर के कई अन्य क्षेत्रों में भी हर वर्ष जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद बारिश शुरू होने के बाद ही सक्रिय होती है। उनका कहना है कि जब यह समस्या हर साल सामने आती है तो इसके स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास क्यों नहीं किए जाते।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी केवल नाम मात्र के लिए रह गए हैं और अब लोगों की उम्मीदें भी उनसे उठती जा रही हैं। ऐसे में नगरवासी मानसून के बीच किसी बड़ी परेशानी से बचने के लिए भगवान भरोसे ही हैं।
नगर के सफ़ाई प्राभारी प्रदीप साहू ने बताया है कि बारी बारी से सफाई चालू है और वारिश होने दो एक दिन में सब कुछ सही हो जाएगा

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