चार वर्षों से अधूरा पड़ा अमृत सरोवर, नहीं रुक रहा पानी, लाखों रुपये की लागत पर उठे सवाल

तेंदूखेड़ा। आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुरू किए गए “अमृत सरोवर” अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से तालाबों का निर्माण कराया गया था, लेकिन कई स्थानों पर निर्माण कार्य गुणवत्ता और पारदर्शिता के सवालों में घिर गया है। ऐसा ही मामला जनपद पंचायत तेंदूखेड़ा अंतर्गत ग्राम धनगौर कला में सामने आया है, जहां लगभग चार वर्ष पूर्व 26.13 लाख रुपये की लागत से निर्मित अमृत सरोवर आज भी अधूरा पड़ा हुआ है और उसमें पानी तक नहीं रुक पा रहा है।
विभागीय जानकारी के अनुसार उक्त अमृत सरोवर को तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 537 दिनांक 29 मार्च 2022 तथा प्रशासकीय स्वीकृति क्रमांक 227 दिनांक 8 अप्रैल 2022 प्राप्त हुई थी। निर्माण कार्य में 15.71 लाख रुपये मजदूरी तथा 10.42 लाख रुपये सामग्री मद में व्यय प्रस्तावित था। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मशीनों का उपयोग किया गया और गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण पहली ही बारिश में तालाब का एक हिस्सा टूट गया था।
ग्रामीण परषोत्तम ठाकुर, सुंदर सिंह ठाकुर, हुकुम पाल, रमेश पाल, प्यारे लाल पाल, कमल मेमार एवं मनोज मेमार ने बताया कि इस तालाब से लगभग 50 एकड़ भूमि सिंचित होती थी तथा करीब 25 किसान परिवार इससे लाभान्वित होते थे। तालाब टूटने के बाद विरोध होने पर विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्से में सूखी मिट्टी डालकर मरम्मत कर दी गई, जो बारिश में बैठ गई। इसके कारण पुनः तालाब के फूटने की स्थिति बन गई थी।
ग्रामीणों के अनुसार अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए बनाए गए बेसियर के बीच चार फीट ऊंची दीवार बनाई गई थी, जिससे जल स्तर नियंत्रित रहता था, लेकिन दोबारा टूटने की आशंका के चलते विभाग ने उक्त दीवार को ही तोड़ दिया। इससे तालाब तो दोबारा नहीं टूटा, लेकिन अब उसमें पानी रुकना ही बंद हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि आज भी तालाब में पिचिंग और मेड़ों पर पत्थरों का खड़ंजा जैसे महत्वपूर्ण कार्य अधूरे हैं, जो तालाब को मजबूती देने और पानी के रिसाव को रोकने के लिए आवश्यक होते हैं। इसके बावजूद निर्माण की अधिकांश राशि निकाली जा चुकी है और कागजों में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।
सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन आरईएस विभाग के एसडीओ बी.एल. साहू के कार्यकाल में बनाए गए अधिकांश अमृत सरोवर, स्टॉप डैम और सुदूर सड़कें गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में रही हैं तथा कई निर्माण कार्य आज भी अधूरे पड़े हुए हैं।
पक्ष जानने का प्रयास
इस संबंध में आरईएस विभाग के एसडीओ शिवाजी गोंड से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
अब ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा अधूरे निर्माण कार्य को पूर्ण कराने की मांग की है।
