50% खराब चमक वाला गेहूं भी खरीदेगी सरकार: किसानों के लिए बड़ा फैसला

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भोपाल। से बड़ी खबर सामने आई है, जहां के नेतृत्व में सरकार ने किसानों के हित में अहम निर्णय लिया है। अब राज्य सरकार 50 प्रतिशत तक खराब चमक वाले गेहूं की भी खरीदी करेगी। इस फैसले से हजारों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने प्राकृतिक परिस्थितियों और पानी की कमी को देखते हुए गुणवत्ता मानकों में भी बदलाव किया है। कम विकसित दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है, वहीं क्षतिग्रस्त दानों की सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है। इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को नुकसान से बचाना और उनकी आय सुनिश्चित करना है।

किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं। हाल ही में उन्होंने भूमि अधिग्रहण पर किसानों को 4 गुना तक मुआवजा देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसके साथ ही दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए उड़द पर समर्थन मूल्य के साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा भी की गई है।

सोयाबीन के बाद अब सरसों पर भी भावांतर योजना लागू करने से किसानों को MSP से अधिक दाम मिलने लगे हैं।

2026: ‘किसान कल्याण वर्ष’

राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। किसानों को मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है, वहीं ‘कृषक मित्र योजना’ के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

खाद वितरण में सुधार

प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। लगभग 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण है। अब किसानों को बिना लाइन लगे, तकनीक के माध्यम से मनचाहे स्थानों से खाद उपलब्ध कराई जा रही है।

दूध उत्पादन से बढ़ेगी आय

सरकार मध्यप्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है और प्रतिदिन 10 लाख किलोग्राम से अधिक दूध का संग्रह हो रहा है। किसानों को अब दूध के दाम में 8 से 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी का लाभ मिल रहा है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत डेयरी यूनिट पर 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी भी दी जा रही है।

आर्थिक सहायता भी जारी

मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6 हजार रुपये की सहायता तीन किस्तों में सीधे खाते में दी जा रही है।

गेहूं उपार्जन में रिकॉर्ड तैयारी

  • उपार्जन लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन
  • उपार्जन केंद्रों की क्षमता 1000 से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन
  • 3516 उपार्जन केंद्र संचालित
  • 8.55 लाख किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई
  • 16.60 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका
  • 2527 करोड़ रुपये का भुगतान

सरकार ने किसानों को यह सुविधा भी दी है कि वे अपनी उपज जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर बेच सकते हैं।

निष्कर्ष:
राज्य सरकार के इन फैसलों से साफ है कि किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। खराब गुणवत्ता वाले गेहूं की खरीदी का निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

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