विकास के दावों की पोल खोलती तस्वीरें

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आजादी के 80 वर्ष बाद भी बमनोदा में पक्की सड़क का इंतजार, कीचड़ भरे रास्ते से प्रभात फेरी निकालने को मजबूर बच्चे

तेंदूखेड़ा। देश ने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर नेताओं ने देश और प्रदेश में हुए विकास कार्यों की उपलब्धियां गिनाईं, लेकिन तेंदूखेड़ा से करीब 25 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बमनोदा की तस्वीरें विकास के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती नजर आईं।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत बमनोदा अंतर्गत माध्यमिक शाला डहरा के छात्र-छात्राएं गांव में प्रभात फेरी निकालने के लिए निकले। हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगाते हुए बच्चे जिस रास्ते से गुजरे, वहां सड़क की जगह कीचड़ ही कीचड़ नजर आया। बारिश के कारण रास्ते में जगह-जगह पानी भरा हुआ था और गड्ढों के चलते पूरा मार्ग दलदल में तब्दील हो गया था।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत बमनोदा कार्यालय से ग्राम डहरा स्थित माध्यमिक शाला तक करीब पौने किलोमीटर का रास्ता है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक इस मार्ग पर न तो पक्की सड़क बनाई गई और न ही कच्चे रास्ते को व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया। बारिश के दिनों में जगह-जगह गड्ढों में पानी भर जाने से कीचड़ की स्थिति बन जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से ग्राम पंचायतों में सरपंच बदलते रहे और देश-प्रदेश में सरकारें भी बदलती रहीं, लेकिन इस मार्ग की तस्वीर नहीं बदली। आज भी स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और राहगीरों को इसी बदहाल रास्ते से आवागमन करना पड़ रहा है।

स्वतंत्रता दिवस पर जब बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर इसी कीचड़ भरे रास्ते से प्रभात फेरी निकाल रहे थे, तब यह तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करती नजर आई। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए पंचायतों में राशि खर्च होने के बावजूद कई स्थानों पर सड़क जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत बमनोदा कार्यालय से डहरा तक के मार्ग का निरीक्षण कराकर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही पूर्व में पंचायत क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों और खर्च की जांच भी कराई जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि स्वतंत्रता के 80 वर्ष बाद भी यदि बच्चों को तिरंगा लेकर कीचड़ भरे रास्ते से प्रभात फेरी निकालनी पड़े, तो यह तस्वीर निश्चित रूप से ग्रामीण विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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