मुनि संघ के सानिध्य में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ‘जन्म कल्याणक’ महोत्सव

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धर्म नगरी कुम्हारी में उमड़ा जनसैलाब:

कुम्हारी। धर्म नगरी कुम्हारी में आयोजित श्री जिन चतुर्विंशति तीर्थंकर मानस्तम्भ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन आज ‘जन्म कल्याणक’ का सौभाग्यशाली उत्सव भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। मुनि श्री 108 मंगलानंद जी महाराज एवं मुनि श्री 108 मंगल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में पूरी नगरी धर्ममयी हो गई है।
इंद्रलोक सा दिखा नजारा:
प्रातः काल से ही प्रतिष्ठा स्थल पर धार्मिक क्रियाओं का दौर शुरू हुआ। प्रतिष्ठाचार्य ‘भारत गौरव’ बाल ब्रह्मचारी धीरज भैया जी (राहतगढ़) एवं बाल ब्रह्मचारी डॉ. नीलेश भैया जी के कुशल निर्देशन में मंत्रोच्चार के बीच जन्म कल्याणक की शास्त्रोक्त विधि संपन्न कराई गई। भगवान के जन्म लेते ही पूरा पंडाल “जय जिनेन्द्र” और “वर्धमान के लाल की जय” के जयकारों से गूंज उठा।
ऐरावत हाथी पर निकली भव्य शोभायात्रा:
महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान की भव्य जन्म शोभायात्रा रही। कुम्हारी नगर के मुख्य मार्ग से अंबेडकर तिराहा से होते हुए विक्रम संवत चौराहे की परिक्रमा करते हुए, एरावत आगे आगे और पंचरथ पीछे-पीछे चलते हुए, इंद्र इंद्राणी , अष्ट देवियां, व भक्तगण डीजे गाजे-बाजे पर भक्त भक्ति में झूमते हुए,सौधर्म इंद्र और कुबेर इंद्र भगवान के बाल रूप को ऐरावत हाथी पर विराजित कर पाण्डुक शिला की ओर बढ़े,जहाँ 108 कलशों से भगवान का अभिषेक किया गया। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव से झूमते-नाचते नजर आए।
मुनि श्री के आशीर्वचन:
इस अवसर पर मुनि श्री मंगलानंद जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि तीर्थंकर का जन्म केवल एक बालक का जन्म नहीं, बल्कि लोक के कल्याण का मार्ग है। उन्होंने भक्तों को संयम और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।प्रतिष्ठा महोत्सव समिति ने बताया कि आगामी दिनों में तप, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक के कार्यक्रम भी इसी भव्यता के साथ आयोजित किए जाएंगे। कुम्हारी और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक धर्म प्रभावना के साक्षी बन रहे हैं।

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