द्वितीय अवसर परीक्षा में अव्यवस्था: छात्रों को 80 किमी दूर भेजा, अभिभावकों में आक्रोश

दमोह, 3 मई 2026
माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा आयोजित ‘द्वितीय अवसर’ परीक्षा में दमोह जिले के ग्रामीण छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के तरादेही, समनापुर, सर्रा और अजीतपुर गांवों के सैकड़ों विद्यार्थियों के परीक्षा केंद्र उनके निवास स्थान से करीब 70 से 80 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय दमोह में बनाए गए हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
🚧 आवागमन बना सबसे बड़ी समस्या
इन गांवों से दमोह तक कोई सीधा परिवहन साधन उपलब्ध नहीं है। छात्रों को पहले तेंदूखेड़ा पहुंचना पड़ता है, जो खुद 25–30 किमी दूर है। इसके बाद वहां से बस या टैक्सी बदलकर दमोह जाना पड़ता है।
- एक तरफ के सफर में 3 से 4 बार वाहन बदलने की मजबूरी
- सुबह 3:30 बजे घर से निकलने के बावजूद 9 बजे की परीक्षा पकड़ना मुश्किल
- रोजाना 600–700 रुपये खर्च, जो गरीब परिवारों के लिए असंभव
👧 छात्राओं की सुरक्षा और परेशानी
सर्रा और तरादेही की छात्राओं को सुबह अंधेरे में सुनसान रास्तों से सफर करना पड़ रहा है। अभिभावकों को साथ जाना पड़ता है, जिससे उनकी रोज़ की मजदूरी भी प्रभावित हो रही है।
🌡️ भीषण गर्मी में 160 किमी का रोजाना सफर
45 डिग्री तापमान में रोजाना आना-जाना छात्रों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। इस कारण कई छात्र समय पर परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
🗣️ ग्राउंड से आवाज़
तरादेही निवासी किसान मुकेश पटेल ने नाराजगी जताते हुए कहा:
“ये द्वितीय अवसर है या बच्चों को फेल करने का प्लान? रोज 700 रुपये टैक्सी का खर्च कहां से लाएं?”
सर्रा की छात्रा रीना ने कहा:
“तैयारी पूरी है, लेकिन अब लगता है सफर ही पास-फेल तय करेगा।”
⚠️ प्रशासन को अल्टीमेटम
चारों गांवों के अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है:
- तरादेही-सर्रा से दमोह तक परीक्षा स्पेशल बस चलाई जाए
- या तेंदूखेड़ा में ही उप-परीक्षा केंद्र बनाया जाए
🏢 अधिकारियों का पक्ष
जिला शिक्षा अधिकारी, दमोह ने बताया कि
“परीक्षा केंद्र का निर्धारण भोपाल स्तर से हुआ है और नकलविहीन परीक्षा के लिए जिला मुख्यालय चुना गया है। फिर भी परिवहन सुविधा पर विचार किया जाएगा।”
📉 भविष्य पर संकट
‘द्वितीय अवसर’ परीक्षा उन छात्रों के लिए अंतिम उम्मीद है, जो 10वीं और 12वीं में एक या अधिक विषयों में अनुत्तीर्ण हो गए थे।
लेकिन सिर्फ दूरी और संसाधनों की कमी के कारण करीब 50% छात्र परीक्षा छोड़ने की सोच रहे हैं, जो उनके भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

📌 निष्कर्ष:
यह स्थिति ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो कई छात्रों का भविष्य सिर्फ दूरी और व्यवस्था की कमी के कारण अंधकार में जा सकता है।
