भगवान कृष्ण का जन्म होते ही पंडाल में लगाए गए नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैयालाल के जय कारेश्रीमद् भागवत कथा के चैथे दिन सृष्टि से श्रीकृष्ण जन्म तक के दिव्य प्रसंगों का वर्णन कथा व्यास पंडित प्रेम नारायण शास्त्री ने सुनाए

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    पंचवटी धाम ब्लॉक परिसर में कार्तिक महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चैथे दिन भक्तिरस से ओतप्रोत वातावरण देखने को मिला। वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास पंडित प्रेम नारायण शास्त्री समनापुर ने अपने ओजस्वनी वाणी से उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य रसपान कराया। कथा व्यास पंडित प्रेम नारायण शास्त्री ने कथा सुनाते हुए कहां कि जब मन पूर्ण रूप से भगवान के चरणों में समर्पित हो जाता है, तब जीवन की समस्त समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने राजा परीक्षित की प्रेरक कथा का वर्णन करते हुए बताया कि तक्षक नाग के श्राप से सात दिनों में मृत्यु सुनिश्चित होने पर राजा परीक्षित ने ऋषियों से प्रश्न किया कि अल्प समय में जीवन को सार्थक कैसे बनाया जाए। तब ऋषियों ने उन्हें भगवान के निरंतर स्मरण, चिंतन और श्रीमद् भागवत कथा श्रवण का मार्ग बताया, जिससे मोक्ष की प्राप्ति संभव है। कथा के दौरान सृष्टि की उत्पत्ति का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि नारायण भगवान की नाभि से कमल प्रकट हुआ, जिससे ब्रह्मा जी का प्राकट्य हुए और सृष्टि की रचना आरंभ हुई। उन्होंने महिलाओं को गृहस्थ जीवन में क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए, इस पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। ध्रव चरित्र, मनु-शतरूपा की कथा तथा भगवान कपिल के अवतार का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान कपिल ने सांख्य शास्त्र का उपदेश दिया, जो वास्तव में जीवन और सृष्टि का विज्ञान है। उन्होंने जीव के गर्भ में प्रवेश और माता के गर्भ में उसकी स्थिति का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि मनुष्य का संसार में आना भी ईश्वर की ही लीला है। कथा में यह भी बताया गया कि सच्चा भक्त भगवान को हर स्थान पर प्रकट कर सकता है, क्योंकि परमात्मा सर्वत्र विद्यमान हैं, आवश्यकता केवल देखने की दृष्टि की है। उन्होंने संदेश दिया कि मंदिर जाते समय अहंकार को साथ लेकर कभी न जाएं। प्रह्लाद और उनके पिता हिरण्यकश्यप की कथा के माध्यम से उन्होंने कहा कि जिस परिवार में एक भी पुत्र सच्चा भक्त निकल जाए, तो उसकी तीन पीढ़ियां तर जाती हैं।
    समुद्र मंथन की कथा, राजा बलि वामन प्रसंग के उपरांत, अजामिल ब्राह्मण के बारे में बताते हुए मोबाइल की दुष्प्रभावों के बारे में बताया उन्होंने कहा कि वृंदावन में देखिए छोटे-छोटे बालक पूजन पाठ में लगे हैं और हमारे यहां मोबाइल में लगे। आजकल के गाने और उसका सुर बेश्वरा हो गया इसके बाद कहा की रामकथा मर्यादा की कथा है भगवान लीलाएं करने के लिए संसार में आते हैं भगवान कृष्ण की कथा सुनाई तदुपरांत श्रीकृष्ण जन्म की कथा के जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। जैसे ही “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष गूंजे, पूरा पंडाल भक्ति और उल्लास से झूम उठा। श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग ने समूचे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर कथा श्रवण किया और धर्मलाभ अर्जित किया कथा कृष्ण जन्म के बाद लड्डूओ के प्रसाद का वितरण किया गया

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