महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम में फर्जीवाड़े का आरोप

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ग्राम पंचायत बमनोदा में सरपंच-सचिव की मनमानी, कागजों में रोजगार – मौके पर नहीं मिले मजदूर

दमोह। जिला दमोह की जनपद पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत फर्जी हाजिरी और डिमांड डालकर शासकीय राशि निकालने का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला ग्राम पंचायत बमनोदा का सामने आया है, जहां सरपंच और सचिव पर मनमानी एवं फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बमनोदा में मस्टर क्रमांक 17762 एवं 17763 के तहत 13 मजदूरों को “स्वफेरिफेरल स्टोन बंध कार्य – अरविंद के खेत से पीपर के हार की ओर” नामक कार्य में लगाए जाने की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। पंचायत रिकॉर्ड में 12 मजदूरों को रोजगार दिया जाना दर्शाया गया है, जिनमें 6 महिला मजदूर भी शामिल बताई गई हैं।

एक तस्बीर में सड़क और मजदूर गीले क्यो उठे सवाल

ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की गई तस्वीर संदेह के घेरे में है। आरोप है किमस्टररोल में एक फोटो अपलोड की गई है। तस्वीर में सड़क गीली दिखाई दे रही है और मजदूर भी भीगे हुए नजर आ रहे हैं, जिससे प्रतीत होता है कि फोटो पुरानी हो सकती है।ओर आज कोई बारिश ग्राम बमनोदा में नही हुई।

इसके अलावा, फोटो लगभग दोपहर ढाई बजे ली गई बताई जा रही है, जबकि नियमानुसार कार्यस्थल की फोटो सुबह के समय लेकर तत्काल सिस्टम में अपलोड करना अनिवार्य है।

मौके पर नहीं मिले मजदूर

स्थानीय स्तर पर की गई जांच में कार्यस्थल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला। जिस कार्य के लिए मजदूरों को कागजों में दर्शाया गया है, वह कार्य पहले ही पूर्ण हो चुका बताया जा रहा है। इससे यह आशंका गहराती है कि अपलोड की गई तस्वीर पुरानी है और फर्जी तरीके से मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई है।

महिलाओं को रोजगार देने के दावे पर भी सवाल

रिकॉर्ड में 6 महिला मजदूरों को काम देने का उल्लेख है, लेकिन अपलोड की गई तस्वीर में केवल एक महिला दिखाई दे रही है। इससे पंचायत के दावों की सत्यता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

“खास लोगों” के खातों में भुगतान का आरोप

सूत्रों के अनुसार जिन मजदूरों के नाम पर डिमांड डाली गई है, उन्होंने वास्तविक रूप से काम नहीं किया। आरोप है कि पंचायत से जुड़े खास लोगों एवं रिश्तेदारों के बैंक खातों में राशि डाली गई है।

डिजिटल सिस्टम भी नहीं रोक पाया गड़बड़ी

सरकार द्वारा मनरेगा में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से पूरी प्रक्रिया डिजिटल की गई है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जीवाड़े की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कागजों में रोजगार दर्शाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि कई मजदूर रोजगार न मिलने के कारण कम मजदूरी पर अन्य जिलों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।

जांच की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद मजदूरों तक पहुंच सके।


ग्राम पंचायत सचिव भूपत यादव ने बताया है की रोजगार सहायक है पंचायत में उनके द्वारा डिमांड डाली गई है आप उनसे बात करे वही रोजगार सहायक पंचम सिंह ने सवालों के जवाव गोल मोल करके दिए उन्होंने बताया कि मजदूरो की शायद छुट्टी रही होगी मजदूर गीले क्यो है इस सवाल पर भी चुप्पी साधी

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