भागवत कथा का श्रवण जीवन को पवित्र कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है – पंडित प्रेम नारायण शास्त्रीकार्तिक महिला मंडल द्वारा आयोजित पंचवटी धाम में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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पुष्पराज यादव तेन्दूखेड़ा


पंचवटी धाम परिसर में कार्तिक महिला मंडल द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से परिपूर्ण वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पंडित प्रेम नारायण शास्त्री (वृंदावन धाम, समनापुर) ने अपने प्रभावशाली प्रवचनों के माध्यम से श्रोताओं को आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया। कथा व्यास ने कहा कि “सुखी वही है जो भगवान की शरण में आता है। कल पर मत जियो, क्योंकि कब जीवन का टिकट कट जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। इसलिए निरंतर भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य भगवान के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो जाता है, तब उसे किसी भी प्रकार की चिंता नहीं सताती। हमें केवल अपनी चिंता न कर दूसरों की चिंता करते हुए सेवा भाव से जीवन व्यतीत करना चाहिए।


उन्होंने बताया कि 84 लाख योनियों में भ्रमण करने के बाद भगवान की कृपा से मनुष्य जन्म प्राप्त होता है, जो अत्यंत अनमोल है। इस जन्म का उद्देश्य केवल भोग-विलास नहीं, बल्कि ईश्वर भक्ति और आत्मकल्याण है। मनुष्य का चेहरा घड़ी का काम करता है, जो उसके आंतरिक भावों और कर्मों को दर्शाता है। दूसरे दिन की कथा में भगवान विष्णु के 24 अवतारों का विस्तार से वर्णन किया गया। साथ ही महर्षि सुखदेव एवं राजा परीक्षित के जन्म की प्रेरक कथा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त धुंधकारी और कोकण की कथा का मार्मिक वर्णन करते हुए पंडित प्रेम नारायण शास्त्री जी ने बताया कि किस प्रकार धुंधकारी अपने पाप कर्मों के कारण प्रेत योनि को प्राप्त हुआ और कोकण के द्वारा कराए गए श्रीमद् भागवत पाठ से उसका उद्धार संभव हुआ। इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भागवत कथा का श्रवण जीवन को पवित्र कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। संगीतमय भजनों और कथा प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे। अंत में आरती एवं महा प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। रात्रि में भजनों का आयोजन किया गया। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में भी श्रीमद् भागवत कथा के विभिन्न प्रेरक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।

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