संकल्पकी पूर्णाहुति राम मंदिर अयोध्या
राम मंदिर… संकल्प की पूर्णाहुति
गोविंद देव गिरी, कोषाध्यक्ष, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
*लक्ष्मण रैकवार*
पांच दिन पूजन और औषधियों से स्नान के बाद धर्म ध्वजा आरोहण…
अवोध्या 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा के बाद 25 नवंबर की तारीख भी अयोध्या के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण का पल समाधान की शांति प्रदान करने वाला था। यह 500 साल के संघर्ष के बाद संकल्प की सिद्धि का क्षण था। ध्वजारोहण का अर्थ है मंदिर की परिपूर्णता। आरोहण से पहले पांच दिन यज्ञ मंडप की वेदी पर धर्म ध्वजा का पूजन हुआ। वेदोक्त सूत्र से पूजन कर विविध औषधियों से स्नान कराया गया। प्रायश्चित कर्म पूजा और षोडशोपचार पूजन हुआ। तुलसी पत्र से श्रीराम सहस्र नामाचंन हुआ। योगिनी, क्षेत्रपाल, वास्तु, नवग्रह पूजन किए गए। परिसर में जितने भी देवी-देवताओं के मंदिर हैं, सभी की पूजा व हवन किए गए। ध्वजारोहण के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति हुई। पूजित ध्वज पर पुष्प अर्पित कर पीएम नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्वस्ति वाचन के घोष के बीच विवाह पंचमी के दिन अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण किया। (जैसा अभिनव आनंद सिंह को बताया)
भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगेः मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्वजारोहण के बाद संबोधित करते हुए कहा, ‘सदियों के घाव और दर्द’ भर रहे हैं, सदियों की वेदना आज विराम पा रही है क्योंकि 500 साल पुराना संकल्प आखिर पूरा हो हो गया है। इस पल को ‘अनोखा’ और ‘दिव्य’ बताते हुए पीएम ने कहा, पवित्र ध्वज झूठ पर सच की जीत का सबूत होगा। राम कोई व्यक्ति नहीं बल्कि मूल्य, अनुशासन और दिशा हैं। त्रेता युग की अयोध्या ने इंसानियत को उसका नैतिक कोड दिया। ब्रिटिश इतिहासकार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘आज से 190 साल पहले, 1835 में मैकाले नामक अंग्रेज ने भारत को जड़ों जड़ों से से उखाड़ने उखाड़ने के के बीज बोए थे। मानसिक गुलामी की नींव रखी थी। दस साल बाद, यानी 2035 में उस अपवित्र घटना को 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं। कुछ दिन पहले ही मैंने एक कार्यक्रम में आग्रह किया था कि हमें आने वाले दस वर्षों तक, उस दस वर्षों का लक्ष्य लेकर चलना है
मोदी ने मंगलवार को अयोध्या में 2 किमी लंबा रोड शो किया। सप्त मंदिर में पूजा की। पीएम मोदी और भागवत ने श्रीराम मंदिर में बालरूप श्रीराम की आरती की।
कि भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगे।’ संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ‘जैसा सपना देखा था, मंदिर उससे भी सुंदर बना है। जिन लोगों ने राम मंदिर के लिए जान गंवाई, उनकी आत्मा को आज शांति मिली होगी। अशोक सिंघल जी, रामचंद्र दास महाराज और डालमिया जी को आज सच में शांति मिली होगी।’
मंदिर की पहली मंजिल पर स्थित राम दरवार में प्रवेश के समय पीएम मोदी ने संघ प्रमुख भागवत को आगे किया और खुद पीछे-पीछे चले।
3 मिनट 48 सेकंड और..
पीएम मोदी, संघ भागवत ने प्रमुख दोपहर 11:58 बजे मंदिर परिसर से लीवर को बाएं घुमाकर ध्वजारोहण किया। 3 मिनट 48 सेकंड में 2 किलो वजनी ध्वज शिखर पर पहुंचा, तो पीएम मोदी भावविभोर हो गए। इस दौरान मोदी, भागवत और योगी आदित्यनाथ हाथ जोड़े ध्वज निहारते रहे।
ऐसे बनी ध्वज की डिजाइन
ध्वज को इंडोलॉजिस्ट ललित मिश्र ने तैयार किया है। केसरिया ध्वज पर सूर्य, ॐ और कोविदार पेड़ की आकृति है। ललित ने ने त्रेता युग के ध्वजों, रंगों, प्रतीकों, संरचना का अध्ययन किया। वे बताते हैं कि मेवाड़ की रामायण की पेंटिंग में अयोध्या का ध्वज देखा था। इसका जिक्र वाल्मीकि रामायण में भी है। इसमें अंकित कोविदार की पहचान के लिए दुर्लभ अभिलेखों का अध्ययन किया। यह मंदार और पारिजात पेड़ों का हाइब्रिड है, जिसे ऋषि कश्यप ने बनाया था।

