रेंजर द्वारा जानकारी ना देने पर राज्य सूचना आयोग ने दर्ज किये दो प्रकरणआवेदनों को लिया सुनवाई में
लक्ष्मण रैकवार
तेंदुखेड़ा—
तारादेही रेंजर द्वारा मांगी गई सूचना समय पर उपलब्ध न कराने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने सख्ती दिखाते हुए दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर आवेदनों को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
मामला क्या है तेंदुखेड़ा निवासी लक्ष्मण रैकवार ने दिनाक 30/6/25 को दो अलग अलग आवेदन प्रस्तुत किये थे,जिसमे आवेदक ने मनरेगा योजना के तहत सभी कार्यो की लागत एवम उनमें खर्च राशि का ब्यौरा मांगा था तथा मनरेगा योजना के तहत काम कर चुके मजदूरो की सूची मांगी थी जो कि रेंजर के द्वारा समय सीमा में नही दी थी इसलिये आवेदक ने पहली अपील उप वन मण्डल कार्यालग में दिनाक 6/5/25 को दाखिल की थी, जिसमे दिनाक 3/6/25को अपीलीय अधिकारी ने दोनों आवेदनों में जानकारी देने का आदेश रेंजर को दिया था लेकिन रेंजर देवेंद्र गुर्जर के द्वारा आदेश को नही माना और आवेदक ने दिनाक राज्य सूचना आयोग भोपाल में दिनाक 1/10/25को द्वतीय अपील प्रस्तुत की।
वन विभाग के संबंधित रेंजर पर आरोप है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दायर आवेदनों पर न तो निर्धारित समय सीमा में जानकारी दी गई, न ही उचित जवाब भेजा गया।
आवेदकों ने प्रथम अपील के बाद भी संतोषजनक जानकारी न मिलने पर शिकायत व द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में दायर की, जिस पर आयोग ने दिनाक पत्र क्रमांक क्रमशः
5416,एवं5517 दिनाक7/11/25 को दोनो अपीलें सुनवाई में ली गयी तथा प्रकरण क्रमांक आ-6017/SIC/ एवम आ-6016/SIC/DAMOH दर्ज कर आवेदक को सूचना दी। दोनों प्रकरण दर्ज कर लिए गए हैं आयोग की कार्रवाई राज्य सूचना आयोग ने आवेदनों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए
आवेदक को जानकारी मिलने का भरोसा जताया है।
सुनवाई के दौरान आयोग के पास यह अधिकार है कि वह रेंजर पर आर्थिक दंड, विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा या लंबित सूचना तत्काल उपलब्ध कराने के आदेश जैसी कार्यवाही कर सके।आरटीआई कानून के तहत प्रावधानसूचना का अधिकार अधिनियम के अनुसार, मांगी गई जानकारी सामान्यतः 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य है, अन्यथा यह अधिनियम का उल्लंघन माना जाता है और संबंधित अधिकारी पर दंड लग सकता है।राज्य सूचना आयोग शिकायतों और अपीलों की सुनवाई कर यह सुनिश्चित करता है कि आम नागरिकों को समय पर और पूर्ण जानकारी मिले तथा विभागीय लापरवाही पर जवाबदेही तय हो सके।

