मुख्य कार्यपालन अधिकारी के आदेश के बाद भी सचिव नही दे रहे जानकारी लोक सूचना अधिकार बना मजाक

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तेंदुखेड़ा—भारत सरकार कार्यो में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से वर्ष 2005 में लोक सूचना अधिकार अधिनियम लायी थी जो देश के कुछ हिस्सों को छोड़ कर सभी जगह लागू किया गया था।इसमे आवेदक आर टी आई यक्ट के तहत किसी भी कार्यालय से कोई भी जानकारी जो अधिनियम के दायरे में आटो हो ले सकता है और लोक सूचना अधिकारी को अधिनियम की धाराओं के पालन करते हुए जानकारी देना होती है लेकिन कुछ लोक सूचना अधिकारी ऐसे होते है जो अधिनियम को सिरे से नकार कर जानकारी नही देते है और भरस्टाचार का खुला समर्थन करते है।ऐसा ही एक मामला तेंदुखेड़ा जनपद में प्रस्तुत दो अपीलों में सामने आया है जहाँ आवेदक लक्ष्मण रैकवार में बताया है की उन्होंने ग्राम पंचायत झलोन में दो अलग अलग आवेंडन प्रस्तुत किये थे जिनमे एक मे वस्तु भंडारण अधिनियम के तहत विगत पांच वर्षों की जानकारी मांगी थी जो लोक सूचना अधिकारी मकुंद सिंह यादव ने तय समय सीमा में जानकारी नही  दी थी,वही दूसरे मामले में लक्ष्मण रैकवार ने बताया है की ग्राम झलोन के शमशान घाट में दो बार हुए ल्गभग 11लाख रुपये के नवीनीकरण की जानकारी मांगी थी उस पर लोक सूचना अधिकारी मकुंद सिंह यादव ने अधिनियम के विपरीत फोटो कॉपी के लिये 2 रुपये की जगह आवेदक से 5 रुपये की मांग की जो अधिनियम केविरुद्ध था।इसलिए आवेदक ने दोनो प्रकरणों में अपीलीय अधिकारी जनपद पंचायत के सामने अपील प्रस्तुत की ओर अपीलीय अधिकारी ने दोनो प्रकरणों में निशुल्क जानकारी देने का आदेश दिया लेकिन आदेश के बाद भी लोक सूचना अधिकारी ने अब तक जानकारी नही थी।लोक सूचना अधिकारी एवं सचिव मकुंद सिंह यादव के द्वारा सरपँच के द्वारा किये गए भ्रस्टाचार को छिपा रहे है और लोक सूचना अधिकार अधिनियम का मजाक उड़ा रहे है।

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