तेंदूखेड़ा में आस्था का केंद्र बना शारदा दुर्गा उत्सव समिति का पंडाल, 20 वर्षों से विराज रहीं मां दुर्गा

प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक रेस्ट हाउस के समीप सजा दुर्गा दरबार, संगीतबद्ध आरती से भक्तिमय हो रहा वातावरण
तेंदूखेड़ा। नगर में नवरात्रि पर्व के दौरान मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है। रेस्ट हाउस के पास तारादेही मार्ग के किनारे स्थित शारदा दुर्गा उत्सव समिति का दुर्गा पंडाल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। समिति द्वारा विगत 20 वर्षों से यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है।
रेस्ट हाउस की बाउंड्री से सटकर बने इस दुर्गा पंडाल की विशेषता इसका ऐतिहासिक और धार्मिक परिवेश है। पंडाल के ठीक बाजू में लगभग 40 वर्ष पुराना भगवान शिव का मंदिर स्थित है, जबकि कुछ दूरी पर संतोषी माता का मंदिर भी बना हुआ है। वहीं, पास में स्थित लगभग 125 वर्ष पुराना रेस्ट हाउस इस स्थान की ऐतिहासिक पहचान को और विशेष बनाता है। प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक भवन के बीच सजे मां दुर्गा के दरबार की छटा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
वार्ड 11 और 12 के रहवासियों का रहता है विशेष सहयोग
शारदा दुर्गा उत्सव समिति के इस आयोजन में मुख्य रूप से वार्ड क्रमांक 11 एवं 12 के रहवासियों का विशेष सहयोग रहता है। इसके अलावा नगर के अन्य श्रद्धालु भी अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करते हैं। सामूहिक सहभागिता से हर वर्ष नवरात्रि में यहां धार्मिक आयोजन उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न होते हैं।
संगीतमय आरती से गूंजता है दुर्गा पंडाल
नवरात्रि के नौ दिनों तक पंडाल में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रहती है। संगीतबद्ध आरती के दौरान भक्तिमय वातावरण देखते ही बनता है। आसपास स्थित भगवान शिव और संतोषी माता के मंदिरों के कारण इस स्थल पर वर्षभर धार्मिक आस्था का माहौल बना रहता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में विशेष वृद्धि देखने को मिलती है।
दो दशक से चली आ रही परंपरा, स्थानीय लोगों की सहभागिता और आसपास के प्राचीन धार्मिक स्थलों की मौजूदगी ने शारदा दुर्गा उत्सव समिति के इस पंडाल को तेंदूखेड़ा की धार्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
