56 वर्षों से एक ही स्थान पर विराजमान हैं मां दुर्गा, भूपेंद्र सोनी बने पंडा

तेंदूखेड़ा। नगर के गल्ला मंडी और थाना परिसर के सामने विराजमान मां दुर्गा की प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। यहां पिछले करीब 56 वर्षों से एक ही स्थान पर मां दुर्गा की स्थापना की परंपरा लगातार चली आ रही है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1970 में धर्मदास नामदेव द्वारा मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना की गई थी। उस समय तेंदूखेड़ा में नगर परिषद के बजाय ग्राम पंचायत हुआ करती थी और दुर्गा उत्सव समितियों का प्रचलन भी नहीं था। इस स्थापना को उस दौर की पहली सार्वजनिक दुर्गा समिति के रूप में पहचान मिली। तभी से नामदेव परिवार और वार्डवासियों के सहयोग से प्रतिवर्ष यहां भव्य दुर्गा उत्सव आयोजित किया जा रहा है।
नगर में मां मथुरा साहू की देवी प्रतिमा के बाद इस प्रतिमा को विशेष स्थान प्राप्त है। देवी प्रतिमाओं की शोभायात्रा में भी इसका दूसरा स्थान रहता है, जो इसकी पुरानी परंपरा और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है।
इस वर्ष भी यहां मां दुर्गा की भव्य स्थापना की गई है। भूपेंद्र उर्फ लालू सोनी पंडा बनकर माता की सेवा में जुटे हैं। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है।
करीब साढ़े पांच दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी नामदेव परिवार और वार्डवासियों के सहयोग से पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। मां दुर्गा का यह दरबार तेंदूखेड़ा की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना हुआ है।
