बच्चों को नहीं मिल रहा पौष्टिक भोजन, प्लेटें खुद धोने का आरोप; चूल्हे पर बन रहा मिड-डे मील

तेंदूखेड़ा। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित मध्याह्न भोजन योजना (पीएम पोषण) को लेकर तेंदूखेड़ा शिक्षा केंद्र की माध्यमिक शाला में सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों ने भोजन निर्धारित मीनू के अनुसार नहीं मिलने और पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं दिए जाने की शिकायत की है।
कक्षा आठवीं के छात्र हर्ष यादव, शालिनी जैन सहित अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें भोजन में अक्सर आलू-बैंगन की सब्जी दी जाती है। बच्चों के मुताबिक सब्जी पतली और बेस्वाद होती है। उनका कहना है कि उन्हें कभी पराठा नहीं मिलता और भोजन में चार रोटियां दी जाती हैं। दोबारा रोटी और सब्जी मांगने पर भोजन नहीं दिया जाता। बच्चों ने यह भी बताया कि भोजन करने के बाद प्लेटें उन्हें स्वयं धोनी पड़ती हैं।
गैस की जगह चूल्हे पर बन रहा था भोजन
मिड-डे मील तैयार होने वाली जगह का जायजा लेने पर वहां भोजन गैस की बजाय चूल्हे पर बनता हुआ मिला। बताया गया कि शासन की ओर से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं और गैस भरवाने के लिए राशि भी दी जाती है, इसके बावजूद चूल्हे पर भोजन तैयार किया जा रहा है। इससे स्कूल परिसर में धुआं और प्रदूषण फैलने की स्थिति भी सामने आई।
मौके पर मिले जगन्नाथ यादव ने बताया कि स्कूल में भोजन सरस्वती स्व-सहायता समूह द्वारा उपलब्ध कराया जाता है और समूह की अध्यक्ष सरोज यादव हैं। जगन्नाथ यादव ने स्वयं को समूह अध्यक्ष का पति बताते हुए कहा कि जितना भोजन वे बच्चों को खिला रहे हैं, उसके मुताबिक शासन से राशि नहीं मिल रही है और उन्हें पिछले चार महीने से भोजन की राशि प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि बच्चों को मीनू के अनुसार ही भोजन दिया जा रहा है।
प्लेटें बच्चों से धुलवाए जाने के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

प्राचार्य ने भी बताई भोजन की गुणवत्ता खराब
शाला के प्राचार्य शैतान सिंह ठाकुर ने बताया कि भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनके द्वारा दो-तीन बार बीआरसी कार्यालय में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक न तो कोई प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही भोजन की गुणवत्ता में सुधार आया।
अधिकारियों के निरीक्षण पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर विद्यालय में मिलने वाले मध्यान्ह भोजन की नियमित निगरानी और निरीक्षण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी नियमित रूप से भोजन की गुणवत्ता, मीनू और व्यवस्था की जांच करें तो स्थिति में सुधार हो सकता है।
इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी सी.जी. गोस्वामी से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया। उन्होंने व्यस्त होने की बात कहते हुए बाद में फोन लगाने को कहा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों और प्राचार्य की शिकायतों की जांच करता है या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि विद्यालय में पीएम पोषण योजना के निर्धारित मीनू, मात्रा, गुणवत्ता और रसोई व्यवस्था का पालन किस स्तर तक किया जा रहा है।
