प्लांटेशन में बनी देहाती चौकीदार कुटिया बनी आकर्षण का केंद्र, अधिकारियों ने की सराहना

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तेंदूखेड़ा। वन विभाग द्वारा इन दिनों क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण कार्य कराया जा रहा है। पौधों की सुरक्षा के लिए जहां सामान्यतः फेंसिंग, खकरी और चौकीदार के ठहरने के लिए ईंट-सीमेंट का कमरा बनाया जाता है, वहीं तारादेही रेंज की देवरी बीट (वृत्त चंदना) में तैयार की गई पारंपरिक शैली की चौकीदार कुटिया लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

जानकारी के अनुसार आरएफ-236 के लगभग 80 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे प्लांटेशन में आधुनिक निर्माण के बजाय ग्रामीण परंपरा पर आधारित झोपड़ीनुमा कुटिया बनाई गई है। स्थानीय लोग इसे देहाती भाषा में “डबुआ” कहते हैं। इसकी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह लकड़ी, बांस, कांस और घास-फूस जैसी प्राकृतिक सामग्री से तैयार की गई है, जिससे अंदर गर्मी कम लगती है और पर्याप्त हवा एवं रोशनी बनी रहती है।

रोपण प्रभारी सुनील मिश्रा ने बताया कि इस कुटिया का निर्माण गांव के चौकीदारों और स्थानीय लोगों ने मिलकर किया है। सबसे पहले चार मजबूत लकड़ियों को लगभग 10-10 फीट की दूरी पर गाड़ा गया। इसके बाद करीब छह फीट की ऊंचाई पर लकड़ियों से मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया गया, जिस पर बैठने और आराम करने की व्यवस्था है। ऊपर बांस के सहारे कांस व घास-फूस से गोलाकार छत बनाई गई, जिसके अंदर बारिश से बचाव के लिए पन्नी लगाई गई। नीचे के खुले हिस्से को चिरे हुए बांस से बंद कर सुरक्षित बनाया गया तथा ऊपर जाने के लिए लकड़ी की सीढ़ी तैयार की गई।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कुटिया न केवल चौकीदार के रहने और निगरानी के लिए उपयोगी है, बल्कि इसकी ऊंचाई के कारण दूर तक नजर रखी जा सकती है, जिससे पौधों की सुरक्षा में भी सुविधा मिलेगी।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुराने समय में लोग जंगलों में इसी प्रकार की झोपड़ियां बनाकर वर्षों तक रहते थे और खेती-बाड़ी भी करते थे। इस पारंपरिक निर्माण शैली को दोबारा जीवंत होते देख ग्रामीणों में भी उत्साह है।

वनकर्मियों ने बताया कि हाल ही में वन मंडल अधिकारी ईश्वर जरांडे भी प्लांटेशन का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने इस कुटिया में बैठकर इसकी उपयोगिता और पारंपरिक निर्माण शैली की सराहना की। उनका कहना था कि स्थानीय संसाधनों से तैयार ऐसी संरचनाएं पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को भी संरक्षित करती हैं।

प्राकृतिक संसाधनों से बनी यह अनोखी चौकीदार कुटिया अब प्लांटेशन में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है और ग्रामीण नवाचार का सुंदर उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है।

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