सीजन की पहली झमाझम बारिश से जनजीवन प्रभावित, ब्यारमा उफान पर; कई पुल डूबे, संपर्क टूटा

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तेंदूखेड़ा। मानसून की सीजन की पहली जोरदार बारिश ने गुरुवार को पूरे तेंदूखेड़ा ब्लॉक को तरबतर कर दिया। सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई झमाझम बारिश दोपहर 1 बजे तक रुक-रुक कर होती रही। बारिश से जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, वहीं बोवनी कर रहे किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई। लगातार हुई वर्षा से नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया।

तेंदूखेड़ा ब्लॉक की सबसे बड़ी ब्यारमा नदी उफान पर आ गई। नदी के बढ़े जलस्तर से जेतगढ़ के समीप बना पुल सुबह करीब 11 बजे जलमग्न हो गया, जिससे तेंदूखेड़ा-तारादेही मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। वहीं ब्यारमा नदी के तेज बहाव के कारण शंकर घाट पुल भी डूब गया तथा तारादेही-झलोन-सर्रा मार्ग का संपर्क टूट गया। क्षेत्र में ब्यारमा नदी पर पड़ने वाले अधिकांश पुल पानी में डूबे नजर आए।

दूसरी ओर सागर-जबलपुर स्टेट हाईवे पर झापन घाट के पास बनाया गया अस्थायी मार्ग भी पानी में डूब जाने से यातायात बंद हो गया। इसके चलते वाहनों को हरदुआ, इमलिया, लकलका, सोमखेड़ा और झापन होकर लगभग 26 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ा।

बारिश का असर गुरैया नदी पर भी देखने को मिला। नदी का जलस्तर बढ़ने से तहसील कार्यालय के समीप बने छोटे पुल तक पानी पहुंच गया। इस सीजन में पहली बार गुरैया नदी पूरे वेग के साथ बहती दिखाई दी।

नगर परिषद की जल निकासी व्यवस्था की खुली पोल

पहली ही तेज बारिश ने नगर परिषद की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों की भी पोल खोल दी। समय पर नालियों की सफाई नहीं होने के कारण थाना परिसर के आसपास, वार्ड क्रमांक 12, वार्ड क्रमांक 10 तथा मुख्य बाजार सहित कई स्थानों पर नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहा। कई इलाकों में जलभराव होने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

वार्ड क्रमांक 12 स्थित मस्जिद के आगे की बस्ती में पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से आसपास के वार्डों और खेतों का पानी एकत्र हो गया। कई घरों के सामने पानी भर गया तथा निकासी पाइपों के माध्यम से पानी घरों में प्रवेश करने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी पूर्व में सफाई प्रभारी प्रदीप साहू को दी गई थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सीजन की पहली ही मूसलाधार बारिश ने एक ओर किसानों के लिए राहत और उम्मीद की सौगात दी, वहीं दूसरी ओर उफनाती नदियों, डूबे पुलों और जलभराव ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।

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