घुटरिया बीट में दिखे सफाई कर्मी गिद्धों की बढ़ती संख्या पर्यावरण के लिये सौगात*

तेंदुखेड़ा—
गिद्धों की संख्या में लंबे समय बाद फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे प्रकृति के सफाई कर्मी एक बार फिर धरती पर सक्रिय हो रहे हैं। गिद्धों की वापसी पर्यावरण के लिए बेहद शुभ संकेत है क्योंकि ये पक्षी मृत पशुओं का कुशलता से सफाया कर बीमारियों को फैलने से रोकते हैं।.गिद्धों की संख्या में गिरावट और वृद्धिपिछले दशकों में डाइक्लोफीनाक जैसी पशु चिकित्सा दवा के कारण गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई थी. भारत में कभी करोड़ों की संख्या में दिखने वाले गिद्ध आज लाखों में सिमट गए थे, सरकार द्वारा डाइक्लोफीनाक के उपयोग पर रोक लगाने, जागरूकता और संरक्षण कार्यक्रमों के कारण अब धीरे-धीरे कुछ क्षेत्रों में इनकी वापसी देखी जा रही है।तेंदुखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत के बगदरी के आश्रित ग्राम घुटरिया के खेतों के पास गिद्धों को देखा गया है।ल्गभग 50 से अधिक गिद्धों को एक मृत मवेशी को खाते हुए देखा गया।पर्यवरण विशेषज्ञ लोगो का मानना है कि गिद्धों की बढ़ती संख्या पर्यावरण के संतुलन के लिये अच्छे संकेत है।
गिद्ध: प्रकृति के सफाईकर्मीगिद्धों का कार्य मृत पशुओं के शवों को शीघ्रता से समाप्त करना है जिससे संक्रमण फैलने का खतरा नहीं रहता ये पक्षी बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं और भोजन शृंखला को संतुलित बनाए रखते हैं, गिद्धों की संख्या में कमी आने पर कुत्ते, सूअर आदि जीव मृत शवों को खाते हैं, जिससे रेबीज जैसी बीमारियों में वृद्धि हो सकती है. पशुपालन वाले क्षेत्रों के लिए गिद्धों की वापसी महामारी और पर्यावरण-संतुलन की दृष्टि से आवश्यक हैसंरक्षण प्रयास और चुनौतियाँवर्तमान में जैव विविधता संरक्षण संगठनों और सरकार की सक्रियता से गिद्धों के लिए सुरक्षित पर्यावरण तैयार किया जा रहा है गिद्धों के पुनर्वास की प्रक्रिया में प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, विषैली दवाओं पर नियंत्रण और जनजागरूकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं स्थानीय समुदायों में गिद्धों की उपयोगिता को पुनः मान्यता मिल रही है.गिद्धों की वापसी हमारे पारिस्थितिकी तंत्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक खबर है अब जरूरत है इन पहलवान सफाई कर्मियों के संरक्षण प्रयासों को लगातार जारी रखने की, ताकि वह भविष्य में भी धरती को बीमारियों और प्रदूषण से बचा सकें।
