गर्भावस्था दौरान महिला के पोषण पर एडवायजरी

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.आर.के.अठया ने सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भावस्था दौरान पोषण पर एडवायजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि संतुलितविविध और नियमित भोजन ही स्वस्थ मॉ व स्वस्थ शिशु की कुंजी है।

गर्भावस्था व भोजन का महत्व

गर्भधारण महिला के जीवन एक सुखद अनुभूति है। यह सुखद अनुभूति तभी सुरक्षित और स्थायी रहती हैजब गर्भवती महिला शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो। मॉ का स्वास्थ्य ही शिशु स्वास्थ्य की नींव होता है। आपके ऑगन में खेलने वाला शिशु तभी स्वस्थ होगाजब उसकी जन्मदात्री मॉ गर्भावस्था दौरान उचित पोषण लेगी।

गर्भावस्था में भोजन की मात्रा व तरीका

गर्भवती महिला का भोजन पौष्टिक और अधिक मात्रा में होना चाहिए। गर्भवती को सामान्य से एक समय के बराबर अतिरिक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। भोजन थोड़ाथोड़ा करके दिन में  4 से5 बार लेना अधिक लाभकारी होता है। भोजन कम मसाले वाला रूचिकर व सुपाच्य होना चाहिए। रात का भोजन हल्का तथा सोने से पहले हल्का करें।

गर्भावस्था में आवश्यक पोषक तत्व व आहार

हरी सब्जियॉ व दालेंपालकमेथीसरसोंबथुआसभी प्रकार की दालें चनाअरहर, मूग ये आयरनप्रोटीन व विटामिन का अच्छा स्त्रोत हैं।

दूध व दूध से बने पदार्थदूधदहीछाछपनीर ये कैल्शियम की पूर्ति कर हडिडयो को मजबूत बनाते हैं।

मौसमी फलपपीताअमरूदकेलाऑवलासंतरा आदि ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ

गुड़मूगफल्लीतिल अंकुरित अनाजलोहे के बर्तन में बना भोजन। इनमें आयरन की मात्रा अधिक होती है।

रक्त अल्पता से बचाव

गर्भावस्था में खून की कमी होना एक गंभीर समस्या है। इससे मॉ में कमजोरी व बच्चे का विकास प्रभावित होता है।

बचाव के उपाय

गर्भावस्था दौरान कम से कम3 माह तक प्रतिदिन आयरन फोलिक एसिड की2 गोलियॉ लें। आयरन युक्त भोजन नियमित रूप से लें। नींबूआंवला जैसे विटामिन सी युंक्त खाद्य पदार्थ साथ लें।

गर्भावस्था में कब तुरंत अस्पताल जाऍ

गर्भावस्था में योनि से रक्तस्रावचेहरेहाथ पैर में अचानक सूजनतेज सिर दर्द या धुंधला दिखाई देनाअत्याधिक थकानसॉस भरनाचेहरे पर पीलापननाखून सफेद होना। गर्भ के अनुसार पेट का बहुत छोटा या बहुत बड़ा होना। तेज बुखार या पेट में तेज दर्द।

पानी व स्वच्छता

दिन में8 से10 गिलास साफ पानी पिऍ। भोजन से पहले व बाद में हाथ साबुन से धोऍ। बासी व खुले भोजन से परहेज करें।

प्रतिदिन8 घण्टे की नींद लें। दिन में कुछ समय आराम करें। परिवार का सहयोग व सकारात्मक माहौल जरूरी है।

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