जज्बा गुजरात के साबरकांठा के धोई गांव में सड़क नहीं थी ग्रामीणों ने तीन दिनों में 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क बना दी, ताकि गांव में हैंडपंप लग सके
गुजरात के साबरकांठा जिले के खेड़ब्रह्मा तालुका के धोई गांव के लोगों ने मिलकर तीन दिन में गांव तक आने के लिए 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क तैयार कर दी। दरअसल गांव में बोरिंग करने के लिए बोरवेल की गाड़ी आनी थी, लेकिन उसे लाने के लिए रास्ता ही नहीं था। गांव में पहली बार हैंडपंप लगने की उम्मीद जगी तो ग्रामीणों ने खुद ही कुदाल-तगाड़ी उठा ली और पहाड़ी जमीन को काटकर रास्ता बना दिया। अब तक गांव जाने के लिए सिर्फ पगडंडियां ही थीं।
कुछ दिन पहले सामाजिक
कार्यकर्ता मित्तलबेन पटेल जब यहां तालाब गहरा कराने आईं, तो उन्हें पता चला कि गर्मियों में यह तालाब सूख जाता है। तब गांव की महिलाएं चार-चार किमी दूर से सिर पर घड़ा रखकर पानी लाती हैं। उन्होंने गांव में हैंडपंप लगाने का इंतजाम किया।
लेकिन बोरवेल की गाड़ी पहुंच नहीं पा रही थी। इसके बाद गांव वाले पगडंडी को सड़क बनाने में जुट गए। रास्ते के बड़े-बड़े पत्थर हटाए गए। जो हट नहीं रहे थे, उन्हें गर्म कर तोड़ा गया। यही नहीं गांव की जो बेटियां दूसरे गांवों में ब्याही गई थीं, उन गांवों में पता चला तो वहां से दामाद भी रास्ता बनाने आ गए। हमने राज्यसभा सांसद रमीलाबेन बारा और पूर्व विधायक अश्विन कोतवाल को कई बार गांव के लिए सड़क बनाने और पानी के लिए गुहार लगाई थी। प्रशासन से भी सड़क-पानी के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला था।

