भोपाल-जबलपुर हाईटेक हाईवे वन्य जीवों के हिसाब से देश का पहला हाईवे…

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वाहनों की रफ्तार खुद कम होगी, वन्यजीवों के लिए 25 टनल, दोनों ओर चेन लिंक फेंसिंग

122.25 करोड़ रु.

खर्च हुए हैं पूरे प्रोजेक्ट पर।

02 किमी में रेड माकिंग इस पर 15 लाख रु. खर्च

ये रेड मार्किंग… चालक को तुरंत सतर्क करती है

सड़क पर लाल रंग की 5 मिमी ऊंची, खुरदरी सतह है। यह सामान्य सड़क से अलग महसूस होती है। ड्राइवर को तुरंत सतर्क कर देती है।

यह संकेत देता है कि गाड़ी वन्यजीवों वाले इलाके में पहुंच गई है, इसलिए रफ्तार धीमी रखना जरूरी है। यह स्पीड ब्रेकर नहीं, बल्कि स्पीड मैनेजर की तरह काम करता है।

अभी यहां बाघ-लेपर्ड… भविष्य में चीते आएंगे

भोपाल से जबलपुर तक बने एनएच-45 पर भारत का पहला हाईटेक नेशनल हाईवे प्रयोग शुरू हुआ है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इस सड़क को ऐसा डिजाइन किया है कि ड्राइवर को चेतावनी भी मिले और वाहन की गति खुद कम हो जाए। यह प्रयोग खासतौर पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व नौरादेही अभ्यारण्य) से गुजरने वाले हिस्से में किया गया है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही सबसे अधिक रहती है। यहां 2 किमी हिस्से में हाईवे के दोनों ओर सफेद शोल्डर लाइन और टेबल-टॉप रेड मार्किंग की गई है।

टेबल-टॉप रेड मार्किंग कैसे काम करती है?

सड़क पर हल्की ऊंचाई होने से रफ्तार धीमी हो जाती है।

लाल रंग ड्राइवर को सावधान कर देता है। गति कम होने से हादसों का खतरा घटता है। जानवर सुरक्षित रहते हैं।

वन्यजीवों की सुरक्षा कैसे होगी?

इस हाईवे पर 11.9 किमी में 25 अंडरपास हैं, ताकि जानवर नीचे से सुरक्षित निकल सकें।

चेन-लिंक फेंसिंग लगाई गई है, जिससे जानवर सीधे हाईवे पर न आएं। स्पीड डिटेक्टर डिवाइस लगाए गए हैं।

नौरादेही के लिए यह प्रोजेक्ट जरूरी क्यों?

यह मप्र का सबसे बड़ा वन्यजीव क्षेत्र है। बाघ, लेपर्ड, हिरण समेत 150 से अधिक पक्षी प्रजातियां हैं। यह कूनो और गांधीसागर के बाद चीतों का तीसरा घर भी होगा।

प्रदेश के सभी नेशनल हाईवे, टाइगर रिजर्व में लागू हो सकता है

प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृतलाल साहू के अनुसार यह पायलट प्रोजेक्ट है। है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि लोग स्पीड कम कर रहे हैं। आगे देखेंगे कि दुर्घटनाएं कितनी कम हुई? वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, लाल रंग की तीनों मौसमों में टिकाऊ क्षमता की स्टडी की जाएगी। इसके बाद पूरी रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी। नतीजे अच्छे रहे तो प्रस्ताव है कि मप्र के सभी टाइगर रिजर्व व सेंचुरी वाले हाईवे पर इसे लागू किया जाए।

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