एक समर्पित आशा, निष्ठावान डॉक्टर और मजबूत स्वास्थ्य तंत्र एक साथ काम करते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है
दुर्गा की जान बचाने की कहानी
aplastic anemia से पीड़ित गर्भवती महिला को मिला अस्पताल में उपचार
आशा का अद्भुत संघर्ष, डॉक्टरों की निष्ठा और टीम का मानवीय प्रयास
ग्राम खमरगौर की गर्भवती महिला दुर्गा प्रजापति (Gravida 5, Live 3) एक हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी से गुजर रही थीं। वे aplastic anemia से पीड़ित थीं, जिसमें शरीर का बोन मेरो (bone marrow) पर्याप्त मात्रा में खून के नए सेल नहीं बना पाता। इसी कारण उनका हीमोग्लोबिन शुरुआत में केवल 4.4 था, जो जान के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति थी। इस बीमारी में बार-बार ब्लड और प्लेटलेट्स की आवश्यकता पड़ती हैं।
दमोह जिले के हटा ब्लॉक की आशा सतीला सिंह ने स्थिति को समझते ही बिना देरी किए दुर्गा को हटा अस्पताल पहुँचाया, जहाँ दो FCM injections लगाए गए और हीमोग्लोबिन बढ़कर 8.0 तक पहुँच गया। कुछ दिनों बाद दुर्गा के शरीर में सूजन आने लगी और उनकी हालत फिर बिगड़ गई। आशा सतीला सिंह उन्हें जिला अस्पताल दमोह लेकर पहुँचीं। यहाँ जांच में हीमोग्लोबिन फिर से कम पाया गया। DHO दमोह डॉ. रीता चटर्जी, BCM और DCM के सहयोग से दो यूनिट ब्लड उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद दुर्गा की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
सागर में डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर है और तुरंत तीन यूनिट ब्लड की आवश्यकता है। दुर्गा के ससुर केवल एक यूनिट ब्लड ही उपलब्ध करा पाए। बाकी ब्लड और प्लेटलेट्स कहीं भी उपलब्ध नहीं हो सके। aplastic anemia के कारण प्लेटलेट्स और खून की कमी तेजी से बढ़ रही थी।
दुर्गा को वार्ड में भर्ती करवाने के बाद आशा सतीला सिंह अकेली ही प्लेटलेट्स की व्यवस्था करने निकल पड़ीं। वे अकेली बंसल अस्पताल, चेतन्या अस्पताल और कई अन्य ब्लड बैंकों तक गईं, लेकिन ब्लड उपलब्ध नहीं हुआ। डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा था कि यदि समय पर प्लेटलेट्स नहीं मिला तो मरीज को बचाना मुश्किल है। इसके बावजूद आशा ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार प्रयास करती रहीं।
आशा ने परिस्थिति आरजेडी डॉ. नीना गिडियन को बताई। उन्होंने तुरंत सभी ग्रुप में इसे डाला। पता चला कि भाग्योदय अस्पताल में है।उन्होंने तुरंत आशा को भाग्योदय अस्पताल भेजा। वहाँ डोनर समीर जैन द्वारा पहले से डोनेट किया गया ब्लड और प्लेटलेट्स उपलब्ध थे, जिन्हें तुरंत मरीज के लिए उपलब्ध कराया गया। यह सहायता सही समय पर मिली और मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित हुई। पूरे उपचार के दौरान बुंदेल खंड मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने लगातार निगरानी रखी, उचित उपचार दिया और मरीज को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया।
सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप दुर्गा ने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया और अब माँ और बच्ची दोनों सुरक्षित हैं। यह कहानी दर्शाती है कि जब एक समर्पित आशा, निष्ठावान डॉक्टर और मजबूत स्वास्थ्य तंत्र एक साथ काम करते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
दुर्गा की कहानी हमे बताती है कि कैसे समपर्ण और टीम वर्क से हम बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है, आशा सतीला सिंह और चिकित्सा अधिकारियों की मेहनत नें दुर्गा की जान बचाई और एक परिवार को खुशियों से भर दिया। जिला कलेक्टर श्री कोचर नें सभी की मेहनत और प्रयासो की सराहना की और आगे भी इसी तरह के प्रयास और परिणाम प्राप्त करनें प्रेरित किया।

