झापन में ब्यारमा नदी का स्टॉप डैम बना हादसों का खतरा, पिछले वर्ष तीन युवकों की हुई थी मौत

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दो साल से टूटा पड़ा है स्टेट हाईवे का पुल, वैकल्पिक मार्ग के बजाय जान जोखिम में डालकर स्टॉप डैम से निकल रहे लोग; प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
तेंदूखेड़ा/झापन। सागर-जबलपुर स्टेट हाईवे पर ग्राम झापन के पास ब्यारमा नदी पर बना पुल करीब दो वर्ष पहले टूट गया था, लेकिन अब तक इसका निर्माण नहीं हो सका है। शासन द्वारा आवागमन के लिए झलोन, हरदुआ हाथीघाट, इमलिया और लकलका होते हुए झापन तक वैकल्पिक मार्ग चिन्हित किया गया है। इसके बावजूद कुछ लोग दूरी और समय बचाने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डालकर ब्यारमा नदी पर बने पुराने स्टॉप डैम से दोपहिया वाहन निकाल रहे हैं। नदी में पानी का तेज बहाव होने के कारण यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्टॉप डैम से वाहन निकालना बना जानलेवा जोखिम
जिस स्थान पर पुल टूटा हुआ है, उससे करीब 100 मीटर की दूरी पर ब्यारमा नदी में एक पुराना स्टॉप डैम बना हुआ है। वर्तमान में नदी में पानी तेज गति से बह रहा है। इसके बावजूद ग्राम झापन और मगदुपुरा के कुछ युवक कथित तौर पर पैसे लेकर लोगों के दोपहिया वाहन स्टॉप डैम से पार करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्टॉप डैम के गेटों के बीच लोहे की पट्टी रखकर किसी तरह वाहन निकालने का प्रयास किया जाता है, जो बेहद खतरनाक है।
कुछ लोग पैसे बचाने के लिए स्वयं ही अपने दोपहिया वाहन निकालने लगते हैं। ऐसे में वाहन का संतुलन बिगड़ने पर उनके तेज बहाव में गिरने की आशंका बनी रहती है। स्टॉप डैम के एक ओर गहरा पानी है, जिसमें बाढ़ के दौरान बहकर आए बड़े पेड़ पड़े हुए हैं, जबकि दूसरी ओर पत्थर होने से गिरने पर गंभीर चोट लग सकती है। पानी के भीतर मौजूद पेड़ और पत्थर हादसे की गंभीरता को और बढ़ा रहे हैं।
पिछले वर्ष तीन युवकों की मौत के बाद भी सबक नहीं
इस स्थान का खतरा इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्ष इसी स्टॉप डैम से निकलने के दौरान तीन युवकों की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद प्रशासन ने कुछ सख्ती दिखाई थी, लेकिन इस वर्ष फिर से उसी तरह की स्थिति बनती नजर आ रही है। नदी में पानी का तेज बहाव होने के बावजूद लोगों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़ी घटना के बाद ही सक्रिय होता है। यदि समय रहते सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए, तो पिछले वर्ष जैसी दर्दनाक घटना दोबारा हो सकती है।
न सूचना पटल, न आवाजाही पर रोक
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वैकल्पिक मार्ग पहले से चिन्हित है और स्टॉप डैम से वाहन निकालना खतरनाक है, तो फिर यहां चेतावनी संबंधी सूचना पटल क्यों नहीं लगाया गया? खतरनाक स्थान पर बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोकने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
इस क्षेत्र में ग्राम पंचायत मगदुपुरा और ग्राम पंचायत झापन की सीमाएं लगती हैं। वहीं, इमलिया पुलिस चौकी और तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित ग्राम पंचायतों और पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
ग्रामीणों का कहना है कि जब शासन ने वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया है, तो लोगों को उसी मार्ग से आवागमन करने के लिए जागरूक करना चाहिए। स्टॉप डैम के दोनों ओर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, खतरनाक रास्ते को तत्काल बंद किया जाए और पैसे लेकर वाहन पार कराने वालों के संबंध में जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे से पहले जागेगा या फिर तीन युवकों की मौत जैसी घटना दोहराए जाने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी? ब्यारमा नदी में बढ़ते बहाव और स्टॉप डैम की खतरनाक स्थिति को देखते हुए तत्काल सुरक्षा इंतजाम करना जरूरी है, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके।

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