कुर्सी पर बैठा ‘देवदूत’: दिव्यांग की बेबसी देख पिघला SDM का दिल, खुद भेजा अस्पताल; जनसुनवाई में दिखा सिस्टम का मानवीय चेहरा

दमोह। सरकारी दफ्तरों और फाइलों के बीच अक्सर संवेदनाएं खो जाने की बातें सुनने को मिलती हैं, लेकिन दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने प्रशासन के मानवीय चेहरे की मिसाल पेश कर दी। यहां एसडीएम सी.जी. गोस्वामी ने एक दिव्यांग व्यक्ति की पीड़ा को समझते हुए न केवल तत्काल मदद की, बल्कि उसे इलाज और आवश्यक प्रक्रिया के लिए स्वयं पहल कर अस्पताल भिजवाया।
जनसुनवाई में पहुंचा बेबस सुरेश
तेंदूखेड़ा नगर के वार्ड क्रमांक 15 निवासी सुरेश घोसी लकवा और शारीरिक विकलांगता से जूझ रहे हैं। वर्षों से परेशान सुरेश अब तक अपना दिव्यांग प्रमाण पत्र नहीं बनवा पाए थे। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में वह कांपते कदमों और लड़खड़ाते शरीर के साथ अपनी समस्या लेकर पहुंचे।
SDM ने दिखाई संवेदनशीलता
जैसे ही एसडीएम सी.जी. गोस्वामी को सुरेश की स्थिति और समस्या की जानकारी मिली, उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के तत्काल कार्रवाई की। एसडीएम ने तहसीलदार की सरकारी गाड़ी उपलब्ध कराई और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (CBMO) को निर्देश दिए कि वे स्वयं सुरेश के साथ जिला मेडिकल बोर्ड तक जाएं, ताकि उनके इलाज और दिव्यांग प्रमाण पत्र से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई जा सके।
आंखों में छलक पड़े खुशी के आंसू
अचानक मिली इस मदद से भावुक हुए सुरेश घोसी की आंखें नम हो गईं। रुंधे गले से उन्होंने हाथ जोड़कर कहा,
“भगवान SDM साहब का भला करे। आज मुझे लगा कि गरीबों की भी कोई सुनने वाला है।”
चर्चा में मानवीय पहल
एसडीएम सी.जी. गोस्वामी की इस संवेदनशील पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए उन्होंने यह साबित किया है कि अगर अधिकारी संवेदनशील हों तो व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की नई किरण बन सकती है।
जनसुनवाई में सामने आई यह तस्वीर एक बार फिर यह संदेश देती है कि संवेदनशील प्रशासन ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है।

