श्रीमद्भागवत कथा में गूंजे भक्ति के स्वर, कृष्ण रासलीला व रुक्मिणी विवाह का भव्य मंचन

तेंदूखेड़ा (दमोह)। समीपस्थ ग्राम गुहची में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ सप्ताह के दौरान भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा वाचक पं. उमाशंकर शास्त्री ने अपने प्रवचनों में भगवान की कृपा, भक्ति और प्रेम का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति करते हैं और उनकी कृपा से ही जीवन में सच्चे आनंद की प्राप्ति होती है। ब्रज भूमि की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि वहां की रज के लिए बड़े-बड़े विद्वान भी लालायित रहते हैं। भगवान का अवतार भक्तों के प्रति करुणा और प्रेम का प्रतीक है।

कथाव्यास ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान केवल मनुष्यों ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के भावों को भी समझते हैं और उनकी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान गाय के लिए बछड़े का रूप धारण करते हैं और बंदरों को अपने हाथों से माखन खिलाते हैं।
प्रवचन के दौरान रासलीला के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में योगमाया की शक्ति से संपन्न यह दिव्य लीला भगवान के प्रेम का सर्वोच्च स्वरूप है। बांसुरी की मधुर धुन का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि हर गोपी को ऐसा अनुभव होता था मानो वह धुन केवल उसी के लिए बज रही हो, जो निर्मल मन और सच्ची भक्ति का प्रतीक है।
इस अवसर पर कथा पंडाल में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का भव्य एवं आकर्षक नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित किया।
