शिक्षक की पहल से बना सिद्ध धाम: जंगलों के बीच आस्था का केंद्र ‘गुन्नौर धाम’

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तेंदुखेड़ा (दमोह)। तेंदुखेड़ा जनपद के ग्राम पंचायत बांदीपुरा के आश्रित ग्राम भोपाठा के पास घने जंगलों और एक जंगली नाले के बीच स्थित “गुन्नौर धाम” आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। कभी एक साधारण पिकनिक स्थल रही यह जगह अब सिद्ध धाम के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी है।

35 वर्ष पहले शिक्षक ने रखी नींव

करीब 35 वर्ष पूर्व शिक्षक गुड्डा आचार्य अपने विद्यार्थियों को 26 जनवरी के अवसर पर इस स्थल पर पिकनिक के लिए लेकर आए थे। प्राकृतिक सौंदर्य और शांति से प्रभावित होकर ग्रामीणों का यहाँ आना-जाना शुरू हुआ। धीरे-धीरे लोगों ने मिलकर इस स्थान को व्यवस्थित किया और यहीं से आस्था का केंद्र विकसित होने लगा।

कभी न सूखने वाले सिद्ध कुंड बने आस्था का आधार

गुन्नौर धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थित दो प्राकृतिक “सिद्ध कुंड” हैं, जिनका पानी भीषण गर्मी में भी कभी समाप्त नहीं होता।
एक कुंड सिद्ध बाबा के चरणों में है, जबकि दूसरा थोड़ी ऊँचाई पर स्थित है। छोटे आकार के बावजूद इन कुंडों में पानी की निरंतरता को ग्रामीण चमत्कार मानते हैं और इसे सिद्ध बाबा की कृपा से जोड़ते हैं।

धाम में स्थापित हैं कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं

धाम में प्रवेश करते ही हनुमान जी की प्रतिमा दिखाई देती है। इसके बाद नाले के भीतर शिवलिंग स्थापित है, जिस पर मटके से बूंद-बूंद जल अभिषेक होता रहता है।
बीच नाले में सिद्ध बाबा विराजमान हैं, जबकि आगे जगदंबा माता और माता शीतला की प्रतिमाएं स्थापित हैं। ग्रामीणों के अनुसार माता शीतला की मूर्ति एक पुजारी को स्वप्न में दिखाई दी थी, जिसके बाद उसे यहाँ स्थापित किया गया।

नियमित धार्मिक आयोजन और जनआस्था

यहाँ समय-समय पर यज्ञ, भजन-कीर्तन, सत्संग और नवरात्रि में जवारे बोने जैसी धार्मिक गतिविधियाँ आयोजित होती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने से कई बीमारियों में भी राहत मिलती है।

पर्यटन स्थल बनने की संभावना

घने जंगल, विशाल चट्टानें, प्राकृतिक गुफाएँ और शांत वातावरण इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं। ग्रामीणों ने शासन से यहाँ मंदिर निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के विकास की मांग की है, ताकि यह स्थान धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सके।

आस्था और सामूहिक विश्वास की मिसाल

गुन्नौर धाम इस बात का उदाहरण है कि सच्ची श्रद्धा और सामूहिक प्रयास से एक साधारण स्थान भी आस्था का बड़ा केंद्र बन सकता है। एक शिक्षक की छोटी सी पहल ने आज हजारों लोगों के विश्वास का रूप ले लिया है।

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