गौरेया नदी के उद्गम स्थल पर हरित क्रांति, वृक्षारोपण में सचिव का समर्पण बना मिसाल

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पर्यावरण संरक्षण / जनपद तेंदुखेड़ा

तेंदुखेड़ा/इमलिडोल — नदियों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रयास अब ज़मीन पर भी असर दिखाने लगे हैं। तेंदुखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत इमलिडोल में गंगोत्री हरित परियोजना के तहत गौरेया नदी के उद्गम स्थल पर बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया जा रहा है, जहां पंचायत सचिव भगवानदास यादव अपने तन, मन और धन से इस अभियान को सफल बनाने में जुटे हैं।

इस परियोजना के तहत लगभग 43 लाख 90 हजार रुपये की लागत से महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कार्य किया जा रहा है। इसकी तकनीकी स्वीकृति 14 अगस्त 2025 तथा प्रशासनिक स्वीकृति 21 अगस्त 2025 को मिली थी, जबकि कार्य 25 अगस्त 2025 से प्रारंभ हुआ। इस योजना की अवधि 5 वर्ष निर्धारित की गई है।

2500 से अधिक पौधों से हरित हो रहा उद्गम स्थल

गौरेया नदी के उद्गम स्थल पर अब तक 2500 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें आम, आंवला, जामुन, अमरूद जैसे फलदार वृक्ष शामिल हैं। पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई, खाद और निराई-गुड़ाई के कारण सभी पौधे स्वस्थ और तेजी से बढ़ रहे हैं। अधिकांश पौधों की ऊंचाई 4 से 5 फीट तक पहुंच चुकी है।

पानी की कमी के बावजूद निरंतर सिंचाई

क्षेत्र में पानी की कमी के बावजूद इस परियोजना में कोई कमी नहीं आने दी जा रही। पंचायत द्वारा पास की ग्राम पंचायत सहजपुर के निजी बोर से पानी खरीदकर सिंचाई की जा रही है। तीन टैंकर दिन-रात इस कार्य में लगे हुए हैं। प्लांटेशन क्षेत्र में दो पानी की टंकियां बनाई गई हैं, जिन्हें टैंकर से भरकर पाइपों के माध्यम से पौधों तक पानी पहुंचाया जाता है।

रोजगार के साथ विकसित हो रही संरचनाएं

इस कार्य से प्रतिदिन 15 से 20 मजदूरों को रोजगार मिल रहा है। साथ ही उद्गम स्थल पर एक कुआं (32 फीट गहरा), पुलिया और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे आवागमन सुगम हो सके। आगे और भी रचनात्मक कार्य प्रस्तावित हैं। वर्तमान में करीब 1 लाख रुपये की लागत से चौकीदार भवन का निर्माण भी जारी है।

निर्धारित सीमा से बाहर भी किया वृक्षारोपण

पंचायत ने केवल स्वीकृत क्षेत्र तक ही सीमित न रहकर, आसपास की वन विभाग की भूमि पर भी अतिरिक्त वृक्षारोपण किया है, जो योजना में शामिल नहीं था। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति पंचायत की गंभीरता को दर्शाती है।

अधिकारियों के मार्गदर्शन से मिला संबल

सचिव भगवानदास यादव ने बताया कि इस कार्य को सफल बनाने में जनपद सीईओ मनीष बागरी, एसडीओ एच.के. राज और उपयंत्री खेमचंद मरावी का विशेष मार्गदर्शन मिला है। उनकी निरंतर निगरानी और सहयोग से यह परियोजना बेहतर ढंग से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि वे और उनकी टीम सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक लगातार स्थल पर मौजूद रहकर कार्य की निगरानी करते हैं।

पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन रहा इमलिडोल

गौरेया नदी के उद्गम स्थल पर किया जा रहा यह वृक्षारोपण न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह ग्रामीण स्तर पर जनभागीदारी और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण भी बनता जा रहा है।

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