झलौन में अवैध शराब का भंडाफोड़: अधिकृत दुकान बंद, निजी ऑफिस से चल रहा था कारोबार

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तेंदूखेड़ा (दमोह)।
दमोह जिले के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम झलौन में अवैध शराब कारोबार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना ने प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मिलीभगत और लापरवाही के चलते यह अवैध धंधा लंबे समय से संचालित हो रहा था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले झलौन में आयुष केंद्र अस्पताल के सामने संचालित शराब दुकान का ग्रामीणों ने विरोध किया था। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर दुकान को धनेटा रोड पर स्थानांतरित किया गया, जहां दुकान के लिए एग्रीमेंट, काउंटर और बोर्ड आदि की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी।

लेकिन मौके पर स्थिति बिल्कुल अलग पाई गई। निर्धारित स्थान पर शराब दुकान बंद मिली और वहां ताला लटका हुआ था। वहीं दूसरी ओर, धनेटा रोड स्थित एक निजी ऑफिस में भारी मात्रा में शराब का भंडारण कर खुलेआम बिक्री की जा रही थी।

इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब भगवती मानव कल्याण संगठन के सदस्य मौके पर पहुंचे। संगठन के सदस्य चंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बिना वैध अनुमति और बोर्ड के ही ऑफिस को शराब दुकान बनाकर अवैध रूप से बिक्री की जा रही थी।

मौके पर मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान वे शराब परिवहन की अनुमति तो दिखा सके, लेकिन बिक्री से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए। इसके बावजूद वहां खुलेआम शराब बेची जा रही थी।

सूचना मिलने पर तेंदूखेड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और बड़ी मात्रा में शराब जब्त कर सील कर दी। पुलिस का कहना है कि परमिट और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मामले में आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद जिला आबकारी अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया, जबकि ठेकेदार का पक्ष तुरंत सुना गया और मामले को वैध बताया गया।

हालांकि, जिला आबकारी अधिकारी रविंद्र खरे ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ठेकेदार को नई दुकान का लाइसेंस हाल ही में मिला है और नई दुकान स्थापित होने में समय लगता है। उनके अनुसार सभी गतिविधियां नियमों के तहत संचालित हो रही हैं।

इधर, ग्रामीणों और संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी ठेकेदार और संबंधित कर्मचारियों पर आबकारी अधिनियम की धारा 34 के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अब बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकृत दुकान बंद थी, तो निजी ऑफिस से शराब बिक्री किसकी अनुमति से की जा रही थी?

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