कूनो नेशनल पार्क की ‘मुखी’ हुई 3 साल की, भारत में चीता पुनर्वास की सफलता का प्रतीक

श्योपुर। मध्यप्रदेश के में आज एक खास और भावनात्मक पल देखने को मिला। भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी’ ने 29 मार्च 2026 को अपने जीवन के तीन वर्ष पूरे कर लिए। इस मौके पर पार्क प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में खुशी और गर्व का माहौल रहा।
मुखी का सफर एक साधारण वन्यजीव की कहानी नहीं, बल्कि भारत में चीतों की वापसी की पूरी यात्रा का प्रतीक बन चुका है। एक छोटे से शावक के रूप में जन्म लेने से लेकर आज एक आत्मविश्वास से भरी वयस्क और मां बनने तक का उसका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है।
वन विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह दिन किसी औपचारिक आयोजन से अधिक भावनात्मक रहा। यह पल उस मेहनत, धैर्य और समर्पण का परिणाम है, जो वर्षों से चीतों के पुनर्वास अभियान में लगाया जा रहा है।
मुखी आज केवल एक चीता नहीं, बल्कि देश में वन्यजीव संरक्षण की सफलता की जीवंत मिसाल बन चुकी है। उसका तीन साल का यह सफर इस बात का संकेत है कि भारत में चीतों की वापसी का अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
हालांकि यह एक छोटा पड़ाव है, लेकिन यह चुपचाप बहुत कुछ कह जाता है—कि भविष्य में भारत के जंगलों में चीतों की दहाड़ फिर से आम हो सकती है।
