मरम्मत के लिए आई राशि पंचायत खाते में पड़ी, दो वर्षों से एक कमरे में संचालित प्राथमिक शाला — बारिश में बढ़ेगी बच्चों की परेशानी

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तेंदुखेड़ा (दमोह)।
तेंदुखेड़ा ब्लॉक की कई प्राथमिक शाला भवन पुराने और जर्जर हो चुके हैं। कई भवनों का कुछ हिस्सा गिर भी चुका है, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिला कलेक्टर द्वारा ऐसे भवनों को चिन्हित कर उनकी मरम्मत के आदेश दिए गए थे और संबंधित पंचायतों के खातों में मरम्मत के लिए राशि भी भेजी गई थी, लेकिन कई स्थानों पर अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

ऐसा ही एक मामला तेंदुखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत बगदरी में सामने आया है। यहां की प्राथमिक शाला करीब दो वर्ष पहले जर्जर हो गई थी। भवन की स्थिति खराब होने के कारण कक्षा 1 से 5वीं तक के लगभग 60 से अधिक बच्चों की पढ़ाई माध्यमिक शाला के एक अतिरिक्त कमरे में कराई जा रही है। एक ही कमरे में पांच कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर पढ़ाना और पढ़ना दोनों ही काफी मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार शासन ने प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत शाला भवन की मरम्मत के लिए 16 अगस्त 2024 को पंचायत के खाते में 3 लाख 15 हजार रुपये की राशि भेजी थी। लेकिन डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी भवन की मरम्मत शुरू नहीं हो पाई है। इससे ग्रामीणों में पंचायत के प्रति नाराजगी देखी जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब राशि काफी पहले आ चुकी है तो मरम्मत कार्य अब तक क्यों नहीं कराया गया। उनका कहना है कि बच्चों को एक कमरे में जानवरों की तरह ठूंसकर बैठाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई का माहौल नहीं बन पा रहा है। पहले भवन में खपरेल की छत थी जो गिर चुकी है, वहीं बगल में बने अतिरिक्त कक्ष की छत भी खराब हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वहां लोहे की सरिया अभी भी सुरक्षित है और उस पर छत ढाली जा सकती थी, लेकिन पंचायत ने इस दिशा में भी कोई पहल नहीं की।

अब बरसात का मौसम नजदीक आने से परेशानी और बढ़ने की आशंका है। एक ही कमरे में संचालित स्कूल में बारिश के दिनों में बच्चों को बैठाने की जगह की समस्या और बढ़ सकती है। नमी, भीड़ और सीमित जगह के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी खड़ी हो सकती हैं।

इस मामले में पंचायत सचिव शोभा सिंह ठाकुर का कहना है कि मरम्मत के लिए आई राशि पंचायत के खाते में सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि मौके पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि भवन की दीवारें काफी क्षतिग्रस्त हैं और उन पर छत डालना संभव नहीं है। इसलिए पुराने भवन की जगह नया भवन बनाने का प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन को नया स्टीमेट भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

ग्रामीणों की मांग है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए प्रशासन जल्द निर्णय लेकर या तो मरम्मत कार्य शुरू करवाए या नया भवन बनवाने की प्रक्रिया तेज करे, ताकि बच्चों को बेहतर वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिल सके।

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