तेंदूखेड़ा जनपद में मनरेगा में फर्जी हाजिरी का खेल? 70 मजदूर कागजों में, ज़मीन पर सन्नाटा

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दमोह/तेंदूखेड़ा। दमोह जिले की तेंदूखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना में बड़े पैमाने पर फर्जी हाजिरी और ऑनलाइन मस्टररोल में गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना कार्य कराए ही मजदूरों की डिमांड डाली जा रही है और शासकीय राशि निकालकर बंदरबांट की जा रही है।


देवरी लीलाधर: 30 मजदूरों की डिमांड, एक जैसी तस्वीर

ग्राम पंचायत देवरी लीलाधर में मस्टर क्रमांक 17245, 17246, 17247 के तहत 10-10 मजदूरों की डिमांड दर्शाई गई है। रिकॉर्ड के अनुसार कुल 30 मजदूरों को “पशु अवरोधक बोल्डर बॉल निर्माण कार्य (दाने बावा से जामो वाले तालाब की ओर)” में कार्यरत बताया गया।

आरोपों के मुख्य बिंदु:

तीनों मस्टररोल में एक ही फोटो ऑनलाइन अपलोड।

रिकॉर्ड में 14 महिलाओं को कार्यरत दर्शाया गया, लेकिन तस्वीर में एक भी महिला नहीं।

कार्यस्थल पर मौके पर कोई मजदूर काम करता नहीं मिला।

संबंधित कार्य महीनों पहले पूर्ण हो चुका बताया जा रहा है।


हर्रई सिंगौरगढ़: 40 मजदूर कागजों में, ज़मीन पर कोई नहीं

ग्राम पंचायत हर्रई सिंगौरगढ़ में मस्टर क्रमांक 17323, 17324, 17325, 17326 के माध्यम से 10-10 मजदूर दर्शाए गए हैं। कुल 40 मजदूरों को “फेरिफेरफल स्टोन बंड निर्माण कार्य (गोशाला की पूर्व दिशा से पश्चिम की ओर)” में लगाया गया बताया गया।

यहाँ भी सवाल खड़े होते हैं:

चारों मस्टररोल में समान फोटो अपलोड।

रिकॉर्ड में 15 महिलाओं को कार्यरत दिखाया गया, लेकिन फोटो में कोई महिला दिखाई नहीं दी।

कार्यस्थल पर मजदूरों की अनुपस्थिति।

कार्य पहले से ही पूर्ण होने की बात सामने आई।


70 मजदूर ऑनलाइन, हकीकत में पलायन

दोनों पंचायतों को मिलाकर कुल 70 मजदूरों को ऑनलाइन कार्यरत दिखाया गया है। जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित कार्यस्थलों पर कोई काम नहीं चल रहा।

ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी डिमांड डालकर राशि खातों में डाली जाती है और बाद में निकासी कर ली जाती है। दूसरी ओर, जिन मजदूरों को कागजों में रोजगार दिया जा रहा है, वे वास्तव में जबलपुर, मंडला जैसे जिलों में जोखिम भरे हालात में काम करने को मजबूर हैं।


बड़ा सवाल: कार्य पूर्ण होने के बाद फिर से डिमांड क्यों?

यदि संबंधित निर्माण कार्य पहले ही पूरे हो चुके हैं, तो उन्हीं कार्यों में पुनः मजदूर दर्शाने का उद्देश्य क्या है?
क्या यह शासकीय राशि के दुरुपयोग का संगठित खेल है?
क्या ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम में गंभीर खामियां हैं?


प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

स्थानीय नागरिकों ने सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड फोटो, मस्टररोल और बैंक भुगतान की गहन जांच हो, तो सच्चाई सामने आ सकती है।

मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है, यदि इसी प्रकार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रही तो शासन की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

अब देखना यह है कि दमोह जिला प्रशासन और जनपद स्तर के अधिकारी इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करते हैं—और क्या 70 मजदूरों की हकीकत सामने आ पाएगी?
ग्राम पंचायत हर्रई सिंगौरगढ़ के सचिव झलकने सिंह लोधी ने बताया कि काम तो लगा है भले मजदूर कम हो, महिलाएं क्यो नही है इस सवाल को वे टॉलते हुए कहा की सरपँच से बात करे में मेट से बात करता हु हाजिरी वही डालते हैं वही देवरी लीलाधर के सचिव रामसिंह लोधी ने बताया है कि आरोप तो सही है मनरेगा के काम रोजगार सहायक देखता है मेरा अभी स्वस्थ्य खराब है

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