झालोन वन परिक्षेत्र में खुलेआम वन लूट, रेंजर–डिप्टी रेंजर पर गंभीर आरोप 🔥

0
Spread the love


तेंदुखेड़ा।
जिला दमोह के तेंदुखेड़ा उपवन मंडल अंतर्गत झालोन वन परिक्षेत्र में वन संपदा की खुलेआम लूट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश मसीही एवं सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी शंकर ठाकुर की कथित मनमानी और लापरवाही के चलते जंगल को लगातार भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
वन परिक्षेत्र झालोन की बीट बजरया और बीट बैरागढ़ में वर्षों से अवैध पत्थर खदानें संचालित हो रही हैं। ये खदानें कोई नई नहीं, बल्कि बेहद पुरानी बताई जा रही हैं, जहां लगातार पत्थरों का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। कार्यवाही के नाम पर कभी-कभार खदानों में केवल मिट्टी डलवा दी जाती है और यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि खदान बंद करा दी गई है, लेकिन पत्थर माफिया दूसरी जगह से फिर उत्खनन शुरू कर देते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन खदानों में दिनदहाड़े पत्थरों की तुड़ाई हो रही है, तब बीट गार्ड और चौकीदार आखिर कहां होते हैं?
बीट बैरागढ़ की जिस जगह खदान संचालित है, वहां से महज 500 मीटर की दूरी पर दो प्लांटेशन स्थल हैं, जहां चौकीदार की नियमित मौजूदगी रहती है। इसके बावजूद खदान से पत्थर निकलना विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है। मौके पर अभी भी जुदाई का पत्थर और फरशिया पड़ी हुई है।


वहीं बीट बजरया में निपानिया हार के पास संचालित दूसरी खदान में उच्च गुणवत्ता का पत्थर निकलता है। यहां भी फरशिया और जुदाई के पत्थर टूटे हुए पड़े मिले हैं। दोनों ही खदानों के आसपास ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों के पहियों के ताजा निशान मौजूद हैं, जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध उत्खनन के साथ-साथ अवैध परिवहन भी धड़ल्ले से हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों जगह पत्थर तुड़ाई के निशान महज दो-तीन दिन पुराने हैं, यानी गतिविधियां हाल ही में हुई हैं। इसके बावजूद न कोई जब्ती, न कोई कार्रवाई—यह वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग के रेंजर की गाड़ियों में गश्त, निगरानी और बीट निरीक्षण के नाम पर शासन का पेट्रोल-डीजल तो खर्च हो रहा है, लेकिन उसी जंगल से वन संपदा की चोरी नहीं रुक पा रही है। यानी सरकारी पैसा भी खर्च, और जंगल भी साफ!
अब सवाल सीधा है—
जब अवैध खनन और परिवहन खुलेआम हो रहा है, तो क्या यह सब अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव है?
या फिर वन माफिया को मौन संरक्षण प्राप्त है?
ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि वन संपदा की इस लूट पर लगाम लग सके।
वन मण्डल अधिकारी ईश्वर राम हरि जरांडे ने बताया है की में दिखवा लेता है लोग रात में कर देते होंगे हरकत, वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश मसीही ने बताया है कि हम लोग भी फ़िराक में उन्हें पकड़ने के लिये लेकिन पकड़ नही पा रहे हैं

About The Author

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *