⚠️ पाँचवें वित्त की सड़क में “पत्थर–घोटाला”! पहली बारिश में बहने को तैयार शांति धाम की सीसी सड़क ⚠️

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**दमोह जिले की तेंदुखेड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत दिनारी में चल रहा शांति धाम का सौंदर्यीकरण कार्य भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बनता जा रहा है। पाँचवें वित्त से बन रही सीसी सड़क में गुणवत्ता की खुलेआम बलि दी जा रही है—वह भी सरपंच-सचिव की कथित मिलीभगत के साये में।
मसाले में पत्थर, सीमेंट नाममात्र—कागज़ों में मजबूती, ज़मीन पर मज़ाक
मौके पर लेबर और मिस्त्री अपने हिसाब से सड़क बना रहे थे। सीसी सड़क में गिट्टी के साथ पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। सीमेंट ना के बराबर मिलाया गया—जहाँ कमी दिखी, वहाँ ऊपर से सीमेंट छिड़क कर खानापूर्ति की गई।
वाइब्रेटर सिर्फ दिखावे के लिए घुमाया गया, बेस में भी सीमेंट नदारद रहा। हैरानी की बात यह कि बेस के बाद महज़ डेढ़ इंच मसाला डालकर सड़क ढाल दी गई—यानी मानक ताक पर, पैसे रास्ते में!


न सरपंच, न सचिव, न इंजीनियर—जिम्मेदारी किसकी?
निरीक्षण के वक्त सरपंच, सचिव या इंजीनियर में से कोई भी मौजूद नहीं था। ऐसे में निर्माण लेबर की मर्जी से चलता रहा। जब सवाल उठे तो सचिव गोकल जैन ने बताया कि कार्य की लागत साढ़े तीन लाख रुपये है और निर्माण एजेंसी सरपंच है—गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी सरपंच की ही होती है। “मैं बात करता हूँ”—कहकर बात टाल दी गई।
ग्रामीणों का अलार्म: पहली बारिश में बह जाएगी सड़क
स्थानीय लोगों का साफ कहना है—इस सड़क में कोई मजबूती नहीं। पहली तेज़ बारिश में सड़क बहने की पूरी आशंका है। ग्रामीणों ने मांग की है कि शांति धाम जैसे संवेदनशील कार्य किसी विशेषज्ञ की निगरानी में कराए जाएँ, ताकि सार्वजनिक धन और आस्था—दोनों की रक्षा हो सके।
सवाल सीधे-सीधे
पाँचवें वित्त की राशि से मानकविहीन निर्माण किसके इशारे पर?
मौके से जिम्मेदार अफसर क्यों गायब?
जांच कब और कार्रवाई किस पर?
निष्कर्ष: शांति के नाम पर हो रहा यह निर्माण भ्रष्टाचार की सड़क बन चुका है। अगर अभी जांच नहीं हुई, तो नुकसान सिर्फ सड़क का नहीं—जनविश्वास का होगा।

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