तेंदूखेड़ा बस स्टैंड पर मौत का खुला इंतज़ामतीन दिन से खुला ट्रांसफार्मर, प्रशासन की चुप्पी सबसे बड़ा खतरा

0
Spread the love


तेंदूखेड़ा नगर के मुख्य बस स्टैंड पर खुले पड़े ट्रांसफार्मर ने प्रशासन और विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन दिनों से जानलेवा स्थिति बनी हुई है, लेकिन न प्रशासन हरकत में है, न विद्युत विभाग को किसी अनहोनी की चिंता।
बस स्टैंड जैसे अतिसंवेदनशील स्थान पर खुला ट्रांसफार्मर छोड़ देना सीधे-सीधे जनजीवन से खिलवाड़ है। यहां रोजाना सैकड़ों यात्री, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग आते-जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि दर्जनों यात्री बसें उसी ट्रांसफार्मर के सामने से मुड़ती हैं, जहां ज़रा-सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि प्रतिदिन दर्जनों मवेशी बस स्टैंड परिसर में घुस आते हैं, जिन्हें वे जान जोखिम में डालकर भगाते हैं। दुकानदार सवाल पूछ रहे हैं—
“अगर किसी मवेशी या इंसान की जान गई, तो क्या जिम्मेदारी प्रशासन लेगा?”
आरोप है कि कनिष्ठ अभियंता की लापरवाही से विद्युत व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। सूचना देने के बावजूद न तो ट्रांसफार्मर को सुरक्षित किया गया, न घेराबंदी हुई और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया। यह रवैया साफ दर्शाता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—
क्या प्रशासन को लाश गिरने के बाद ही चेतना आती है?
क्या बस स्टैंड पर कोई हादसा हो जाए, तब ही कार्रवाई होगी?
नगरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया और कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी प्रशासन और विद्युत विभाग के अधिकारियों की होगी, जिसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
लोगों ने मांग की है कि तत्काल ट्रांसफार्मर को सुरक्षित किया जाए और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक उदासीनता दोहराई न जाए।

About The Author

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *