नेशनल लोक अदालत में सुलह व समझौते से आपसी विवादों का हुआ अंत न्यायालय में लंबित 584 प्रकरणों का हुआ निराकरण

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दमोह : 13 दिसम्बर 2025

            राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार परस्पर समझौते के आधार पर त्वरित एवं सुलभ न्याय दिये जाने के उद्देश्य से नेशनल लोक अदालत जिला न्यायालय दमोह तथा तहसील न्यायालय, हटा, पथरिया, तेंदूखेड़ा में प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह श्री सुभाष सोलंकी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। जिला मुख्यालय दमोह पर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ विशेष न्यायाधीश/प्रभारी अधिकारी नेशनल लोक अदालत श्री उदय सिंह मरावी द्वारा ए.डी.आर. भवन में मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्री मोहम्मद अजहर, मुख्य न्यायिक मजिस्टेट सुश्री स्नेहा सिंह सहित जिला मुख्यालय दमोह में पदस्थ समस्त न्यायाधीशगण, अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ दमोह श्री कमलेश भारद्वाज, उपाध्यक्ष श्री सुरेश कुमार खत्री, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री रजनीष चौरसिया, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री मनीष नगाइच सहित समस्त डिफेंस काउंसिल, प्रशासनिक अधिकारी जिला न्यायालय श्री एस.एन. ओझा, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री सतीष कपस्या, अध्यक्ष तृतीय श्रेणी न्यायिक कर्मचारी संघ श्री दीपक सोनी, अध्यक्ष चतुर्थ श्रेणी न्यायिक कर्मचारी संघ श्री विश्वनाथ बिल्थरे सहित न्यायालयीन व विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारीगण उपस्थित हुये।

            विशेष न्यायाधीश/प्रभारी अधिकारी नेशनल लोक अदालत श्री उदय सिंह मरावी ने संबोधित करते हुये कहा वर्ष की इस अंतिम लोक अदालत के सफल होने के लिये प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के  द्वारा मोटर दुर्घटना व चैक बाउंस के प्रकरणों की प्रिसिटिंग आयोजित किये जाने हेतु निर्देश दिये गये थे, जिसके परिपालन में प्रिसिटिंग आयोजित की गयी हैं। प्रकरणों के निराकरण हेतु संपूर्ण जिले में 21 खण्डपीठों का गठन किया गया है। आशा है कि यह लोक अदालत पूर्व की भांति इस बार भी सभी के सहयोग से सफल होगी।

            जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री रजनीष चैरसिया द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि उक्त नेशनल लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य दांडिक, सिविल, चैक अनादरण, वाहन दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा, वैवाहिक मामले, विद्युत से संबंधित प्रकरणों के साथ-साथ बैंकों, दूरसंचार, विद्युत एवं नगर पालिका के प्रिलिटिगेशन प्रकरणों को निराकरण हेतु रखा गया था। नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना के 25 प्रकरणों में राशि एक करोड़ इक्कीस लाख अड़सठ हजार रूपये के अवार्ड पारित किये जाकर न्यायालयों में लंबित विद्युत के 122, वैवाहिक के 11, चैक अनादरण के 67 एवं दांडिक के 253 प्रकरणों सहित 584 प्रकरणों का नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकरण किया जाकर कुल तीन करोड़ साठ लाख तैंतीस हजार रूपये के अवार्ड पारित किये गये। इसी प्रकार नेशनल लोक अदालत के माध्यम से बैंक, विद्युत एवं नगरपालिका के 969 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया जाकर सड़सठ लाख रूपये से अधिक की वसूली की गई।

भाई-बहनों के बीच चल रहे संपत्ति के विवाद का हुआ अंत

            द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड दमोह सुश्री अनुप्रेक्षा जैन के न्यायालय में लंबित प्रकरण भाईयों के द्वारा अपनी 4 बहनों के विरूद्ध दमोह शहर में स्थित मकान एवं दुकान व पथरिया स्थित लगभग 4 हेक्टेयर भूमि के संबंध में घोषणा एवं स्थायी निषेधाज्ञा हेतु प्रस्तुत किया गया था। जिसमें राजीनामा की संभावना को देखते हुये उक्त प्रकरण नेशनल लोक अदालत में रखा गया था। प्रकरण में पक्षकारों के उपस्थित होने पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा की गई, चर्चा के दौरान ज्ञात हुआ कि पक्षकारों के मध्य लंबे समय से राजस्व न्यायालय में प्रकरण चल रहा है, जिसके कारण दोनों पक्षों में विवाद है। समझाइश दिये जाने पर दोनों पक्ष इस बात पर राजी हुये कि प्रतिवादी क्रमांक 1 बहन सीमा के द्वारा ग्राम खौजाखेड़ी की भूमि रकवा 0.78 हे. लखनलाल कोरी प्रतिवादी क्रमांक 5 को विक्रय कर दी और अपना हिस्सा प्राप्त कर लिया है, वादीगण उक्त प्रकरण के संबंध में भविष्य में कोई कार्यवाही नही करेंगें तथा शेष प्रतिवादीगण वादीगण के स्वामित्व व काबिज दमोह स्थित मकान एवं दुकान सहित विवादित संपत्ति में हस्तक्षेप नही करेंगें। साथ ही प्रतिवादीगण भविष्य में कभी भी किसी अन्य चल/अचल संपत्ति के संबंध में कोई दावा नही करेंगें। भाईयों के  द्वारा किया गया बटवारा प्रतिवादीगण को मान्य होगा, इस प्रकार सगे भाई-बहनों के बीच संपत्ति के कारण हुये विवाद का लोक अदालत के माध्यम से पटाक्षेप हो गया और दोनों पक्ष हंसते-हंसते न्यायालय से विदा हुये, उन्हें न्यायाधीशगण द्वारा उपहार स्वरूप फलदार पौधों का वितरण भी किया गया।

कुटुम्ब न्यायालय दमोह में हुआ 43 प्रकरणों का निराकरण

शंका के आधार पर अलग रह रहे पति-पत्नि हुए एक

            कुटुम्ब न्यायालय में लंबित 43 प्रकरणों में पति-पत्नि के द्वारा प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्री मोहम्मद अजहर व सुलहकर्ता अधिवक्ता के द्वारा समझाईश दिये जाने पर आपसी राजीनामा कर अपने प्रकरणों को खुशी-खुशी समाप्त किया।

            न्यायालय में लंबित भरण पोषण के एक प्रकरण में पत्नि के द्वारा पति के विरूद्ध प्रकरण प्रस्तुत कर स्वयं एवं अपने 3 बच्चों के लिये भरण पोषण राशि की मांग की गई थी। प्रकरण में राजीनामा की गुंजाइश को देखते हुए न्यायालय द्वारा उक्त प्रकरण को लोक अदालत में रखा गया और दोनों पक्षों को चर्चा हेतु आहूत किया गया, चर्चा के दौरान ज्ञात हुआ कि पति मकान निर्माण में मजदूरी का कार्य करता है, जिसके कारण अक्सर वह विलंब से घर पहुंचता है, विलंब से घर पहुंचने के कारण पत्नि बेवजह पति पर शंका करती है, जिसके कारण दोनों अलग-अलग रह रहे है। न्यायालय द्वारा समझाइश दिये जाने एवं 3 बच्चों का भविष्य देखते हुए वे एक साथ रहने तैयार हुए और न्यायालय में एक दूसरे को माला डालकर विदा हुए, दोनों पक्षों को न्यायाधीशगण द्वारा स्मृति के रूप में फलदार पौधे दिये गये।

            यह नेशनल लोक अदालत में सभी न्यायाधीशों एवं सभी अभिभाषक बंधुओं, जिला प्रशासन, पत्रकार बंधुओं जिला न्यायालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त स्टाफ के सहयोग से सम्पन्न हुई। श्री रजनीश चैरसिया जिला विधिक सहायता अधिकारी ने सभी के सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया।

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