खगोलीय संयोग -धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से कुंभ से पहले विशेष संयोग 2026 में पड़ेगा ज्येष्ठ अधिकमास, 13 माह का होगा साल
हिंदू पंचांग के अनुसार आगामी वर्ष 2026 विशेष खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है। हिंदू पंचांग गणना के मुताबिक यह वर्ष 13 महीनों का होगा, क्योंकि 2026 में अधिकमास पड़ रहा है। इस बार अधिकमास ज्येष्ठ माह में आने वाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सिंहस्थ कुंभ से पहले मई का महीना बेहद फलदायक माना जा रहा है। हिंदू समय गणना पूरी तरह विक्रम संवत पर आधारित है और वर्तमान में विक्रम संवत 2082 चल रहा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला का
है। कहना है कि वर्ष 2026 में बन रहा यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और शुभगौरतलब है कि पंचांग की गणना के अनुसार हर 2-3 वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे
अधिकमास कहा जाता है। यह तब बनता है जब किसी पूरे चंद्र मास के दौरान सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करता। चंद्र मास और सौर मास की गति में अंतर को संतुलित
करने के लिए ही यह अतिरिक्त महीना पंचांग में जुड़ता है। इसे अधिकमास, अध्याय मास या मलमास भी कहा जाता है।
धार्मिक महत्व-धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास को अत्यंत पवित्र माना गया है। इस महीने में किए गए व्रत, जप, तप, दान-पुण्य और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक मिलता है। 2026 में जेष्ठ अधिकमास आने के कारण यह वर्ष आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला ने
ये कार्य करें पूरे माह
हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार ज्येष्ठ का काल लगभग 58 से 59 दिनों तक होगा। इसे ही अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। मई वैसे ही सबसे बड़ा माना जाता है। भगवान पुरुषोतम की साधना की जाती है। इसे विशेष धार्मिक कर्मों और पुण्य कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि अधिकमास में पूरे माह धर्म से संबंधित मांगलिक कार्य (विवाह और गृह प्रवेश, मंडन आदि को छोड़कर), तीर्थ यात्रा, भागवत, भजन, पूजन, कीर्तन, ब्राह्मणों को दान एक माह तक पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। शिप्रा नदी में स्नान के बाद महाकालेश्वर मंदिर में पूजन अर्चना कर पितरों का तर्पण करने की भी परम्परा है।
बताया कि हिंदू माह ज्येष्ठ मई में आएगा, इसे पुरुषोत्तम एकादशी भी कहा जाता है। 2028 कुंभ से पहले आने के कारण अधिक प्रभावशाली होगा। अधिक मास की उत्पत्ति पंचांग की तिथियों के घटने और
बढ़ने से होती है। घंटा, मिनट, कला, विकला के कुल जमा होने से बनने वाले समय, उस समय से दिन का निर्माण होता, दिन से सप्ताह का और सप्ताह से महीने का निर्माण होता है।

