राजस्व एवं स्वास्थ्य विभाग के समन्वय सेपीआईसीयू दमोह में मिले उपचार से बची आदिवासी नवजात शिशु की जान
दमोह:
विकासखंड तेन्दूखेड़ा के ग्राम हथोली के रहने वाले एक परिवार दशोदा-नरेश आदिवासी के 33 दिन के नवजात शिशु की स्वास्थ्य स्थिति लगातार गिर रही थी। वे शिशु को अस्पताल लाने के इच्छुक भी नहीं थे। इस गंभीर मामले की सूचना जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रीता चटर्जी तक पहॅुची। उन्होने बिना विलंब एसडीएम तेन्दूखेड़ा सौरभ गंधर्व को शिशु की गिरती स्वास्थ्य हालत के बारे में अवगत कराया और बताया कि बच्चे के अभिभावक अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं है। जबकि शिशु की स्थिति चिंताजनक है। एसडीएम ने तत्काल कार्यवाही करते हुए परिवार को उचित परामर्श देकर बच्चे को जिला चिकित्सालय पीआईसीयू दमोह में भर्ती कराया गया। डॉ. जलज बजाज, नर्सिंग स्टॉफ और सहयोगी कर्मचारियों के सात दिनों तक की गई शिशु की समर्पित स्वास्थ्य देखभाल से आज शिशु को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया।
पीआईसीयू में भर्ती के समय शिशु का वजन केवल 1800 ग्राम था तथा गंभीर संक्रमण की स्थिति पाई गई। सात दिनों तक पीआईसीयू में डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ और सहयोगी कर्मचारियों ने निरंतर निगरानी और शिशु की समुचित देखभाल की गई। उपचार के दौरान शिशु का वजन 200 ग्राम बढ़ा, जो उसके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत था।
उपचार के दौरान शिशु की मॉ बार-बार नवजात को घर ले जाने की जिद करती रही, परंतु टीम ने धैर्यपूर्वक समझाते हुए बताया कि बच्चे की जान बचाने के लिए उसका पीआईसीयू में रहना आवश्यक है। लगातार परामर्श और दिए जा रहे स्वास्थ्य उपचार और देखभाल से बच्चे को अस्पताल में रखने के लिए सहमत हुई। अंतरा फाउण्डेशन ने भी पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया गया।
आ सात दिनों की समर्पित स्वास्थ्य देखभाल से आज शिशु को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया। मॉ को शिशु के आगे के फॉलोअप के लिए समझाइश दी गई। मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं को भी शिशु के स्वास्थ्य पर निरंतर निगरानी रखने की हिदायत दी गई।

