पुरूषों में परिवार नियोजन के प्रति सहभागिता बढ़ाना तथा पुरूष नसबंदी सेजुडे़ भ्रांतियों को दूर करना कार्यक्रम का उद्देश्यपुरूष सहभागिता सम्मेलन आयोजित किया गया
दमोह:
जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम सीतानगर के पंचायत भवन में पुरूष सहभागिता सम्मेलन आयोजित किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर.के. अठया ने बताया कार्यक्रम का उद्देश्य पुरूषों में परिवार नियोजन के प्रति सहभागिता बढ़ाना तथा पुरूष नसबंदी से जुडे़ भ्रांतियों को दूर करना था। कार्यक्रम में जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. रीता चटर्जी ने प्रश्नोत्तरी के माध्यम से पुरूष नसबंदी से जुड़ी भ्रांतियों का समाधान किया । इस दौरान सरपंच नरोत्तम पटेल, स्थानीय पुरूष वर्ग, परिवारकल्याण के स्थाई साधन अपनाने के इच्छुक दंपत्ति, धात्री माताएं विशेष रूप से मौजूद रहीं।
पुरूष नसबंदी अपनाना परिवार की सुरक्षा में बड़ी जिम्मेदारी
कार्यक्रम में जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. रीता चटर्जी ने उपस्थित पुरूषों को पुरूष नसबंदी के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी । कार्यक्रम के दौरान पुरूष नसबंदी से जुड़े सामाजिक भ्रम यथा- नामर्दी, यौन इच्छा में कमी, कमजोरी आना, नसबंदी का जोखिमपूर्ण होना जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। इस संबंध में भ्रांतियों को दूर किया गया।
बिना चीरा, बिना टांका, गर्भ नियंत्रण का बेहद आसान तरीका
डॉ. चटर्जी ने बताया पुरूष नसबंदी जिसे वैसेक्टॉमी भी कहते हैं, गर्भ निरोध या गर्भ नियंत्रण का बेहद आसान तरीका है, यह बिना चीरा, बिना टांका तकनीक है, जिसमें केवल 10 से 15 मिनट ही लगते है। कोई जटिलता नहीं होती, सुरक्षित, सरल और कम समय में होने वाली प्रक्रिया इसमें खून बहना, कमजोरी, बेहोशी जैसी कोई जटिलता नहीं होती। उन्होंने बताया महिला नसबंदी की तुलना में अधिक सुरक्षित, सरल और कम समय में होने वाली प्रक्रिया है। नसबंदी कराने के बाद वीर्य स्खलन के दौरान शुक्राणु (स्पर्म) नहीं होता जो बच्चा पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है। पुरूष नसबंदी में उस ट्यूब को सील कर दिया जाता है, जो अण्डकोष से स्पर्म को पेनिस तक लेकर जाता है। नसबंदी करने के बाद कामेच्छा एवं कामशक्ति पहले जैसे ही बनी रहती है। क्योंकि कामशक्ति या कामेच्छा हार्मोन्स पर निर्भर होती है, जो सीधे खून में चले जाते है।
35 से अधिक उम्र की महिलाओं में नसबंदी जोखिम पूर्ण
सम्मेलन के दौरान बताया गया कि जिन महिलाओं का पहला बच्चा ऑपरेशन से हुआ हो, दो से अधिक बार गर्भधारण, पुरानी बीमारी, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या 35 से अधिक उम्र की महिलाओं में नसबंदी जोखिमपूर्ण होती है, ऐसे महिला के पुरूष साथी को पुरूष नसबंदी अपनाना परिवार की सुरक्षा में बड़ी जिम्मेदारी होती है। इस दौरान जिला विस्तार एवं माध्यम अधिकारी, एएमओ डॉ. अवधेश, एएसओ, बीपीएम लखन गोयल, क्षेत्र के सुपरवाईजर ओ.पी. साहू सहित सीएचओ, एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

