प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सर्रा में नहीं मिल रही 108 वाहन की आपातकालीन सेवा ग्रामीणों को करना पड़ता है 2 से 3 घंटे तक इंतजार

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विशाल रजक तेंदुखेड़ा

समस्या- 50 या 90 किमी दूर से बुलानी पड़ती है एंबुलेंस तब जाकर मिलती है 108 की सेवा कभी कभी इंतजार में चली जाती है लोगों की जान- घायलों व प्रसूताओं को होती है परेशानी

-स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर तेंदूखेड़ा ब्लॉक के दर्जनों उप स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कई सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे ही हाल आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सर्रा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जुझ रहा है। इस केंद्र में आने वाले दो दर्जन से अधिक गांव के लोग हमेशा से आपातकालीन सेवा 108 एम्बुलेंस के लिए परेशान हैं। क्योंकि यहां पर मरीजों को गंभीर स्थिति में 3 से 4 घंटे तक 108 की सेवा के लिए इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि सर्रा उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के लिए 50 या 30 किमी दूर या फिर 90 किमी दूर दमोह से 108 वाहन को बुलाना पड़ता है। तब जाकर मरीजों को 108 सेवा का लाभ मिल पाता है। दरअसल ब्लॉक अंतर्गत आने वाले सर्रा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस न होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है, जबकि इस केंद्र के भरोसे 25 से अधिक गांव है। जिससे प्रसूता महिलाओं के साथ गंभीर मरीजों के लिए 108 व जननी वाहन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। तेंदूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र से या फिर तारादेही से एम्बुलेंस बुलानी पड़ती है। अगर दोनों जगह एम्बुलेंस नहीं होने से जिला मुख्यालय दमोह से 90 किमी दूर से बुलाना पड़ता है। इस कारण कई बार विवाद के हालत बन जाते है। वाहन की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर लगाने पर या तो तेंदूखेड़ा का वाहन जाता है या फिर दमोह या अन्य जगह से वाहन बुलाए जाते हैं। जिनमें अधिकांश वाहन तो जाते ही नही और जो जाते है। तीन से चार घंटे बाद मौका स्थल तक पहुंच पाते हैं
मांग को किया गया अनदेखा
सर्रा निवासी मान सिंह यादव ने बताया कि कई साल से प्राथमिक स्वस्थ केंद्र में जननी और 108 वाहन की मांग कर रहे है, लेकिन आज तक मांग पूरी नहीं हुई। जबकि सर्रा प्राथमिक स्वस्थ केंद्र में प्रतिदिन दो से तीन प्रसूता महिलाएं आती हैं। ग्रामीण कुंज बिहारी विश्वकर्मा ने बताया कि मेरा गांव सर्रा से 7 किमी दूर है और गांव में कोई चार पहिया वाहन नहीं है। जब प्रसूता महिलाओं को रात के समय तकलीफ होती है तो उनको बाइक पर बैठाकर सर्रा लेकर आना पड़ता है। सरसेला निवासी राहुल ठाकुर ने बताया की गांव से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सर्रा तक तो महिलाओं को मुश्किलों का सामना करके ले जाते हैं। यदि किसी महिला को सर्रा से इमरजेंसी में रेफर किया जाता है तो कई घंटों तक कोई वाहन नहीं मिलता है कभी कभी बाइक से तेंदूखेड़ा लेकर गए हैं। लोग जननी वाहन की लगातार मांग कर रहे है, लेकिन लाभ आज तक इस सर्रा को 108 वाहन नहीं मिला सका है
गांवों के सरपंच भी उठा चुके है मांग
भैंसा के सरपंच जगन ठाकुर ने बताया की सर्रा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जननी वाहन बहुत जरूरी है, क्योंकि अभी वाहन तेंदूखेड़ा तारादेही से आता है, लेकिन कभी-कभी दमोह से भी 108 वाहन को बुलाना पड़ता है। जहां सूचना देने के दो घंटे से तीन घंटे बाद आ पाता है। और फिर वापस जाने में भी दो घंटे लगते हैं। कई बार जननी वाहन की मांग कर चुके हैं, लेकिन वाहन नहीं आया है। कुदपुरा सरपंच पुनु परसते ने बताया की जननी वाहन की मदद के लिए जब भी फोन लगाते है तो वाहन तेंदूखेड़ा तारादेही से आता है। इन सभी सेंटरो की दूरी सर्रा से 40-50 किमी दूर है। जिनको आने में दो घंटे और वापस जाने में दो घंटे लगते हैं। ऐसी स्तिथि में कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कई बार जननी वाहन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भेजने की बात कही लेकिन आज तक कोई निराकरण नहीं हुआ
डॉक्टरों के आवास बने पक्षियों के घर
वहीं लोगों ने कहा कि सर्रा में डॉक्टरों के लिए शासन द्वारा लाखों रुपए खर्च कर पक्के आवास भी बनाए गए हैं लेकिन यह आवास अब पक्षियों के लिए घर बने हुए हैं। या फिर देखरेख नहीं होने के चलते खंडहर होते हुए नजर आ रहे हैं। ग्रामवासियों का कहना है अगर सर्रा केंद्र अंतर्गत आने वाले पूरे 25 गांव की जनसंख्या की बात करें तो क्षेत्र में 15 हजार से अधिक की संख्या में हैं और लोग निवास करते हैं लेकिन इन लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं कुछ भी नहीं है
एम्बुलेंस के इंतजार में हो चुकी है मौत
सर्रा स्वास्थ्य केंद्र में 108 वाहन नहीं होने के कारण कई लोगों की मौत तक हो चुकी है क्योंकि 108 वाहन को बुलाने पर दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है तब जाकर वाहन आता है जबकि तक मरीज या फिर घायल व्यक्ति की मौत हो जाती है। दूसरी ओर यह क्षेत्र जबेरा विधानसभा में आता है जहां के विधायक राज्यमंत्री है फिर भी इस क्षेत्र में 108 वाहन उपलब्ध नहीं है साथ ही अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं

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